​अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के संयुक्त तत्त्वावधान में ‘भारतीय दार्शनिक दिवस’ का गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर ‘गुरुतत्व दर्शन’ विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें देश के प्रख्यात विचारकों और शिक्षाविदों ने गुरुतत्व के दार्शनिक एवं व्यावहारिक पहलुओं पर गहन प्रकाश डाला।

विवेक और संतुलन का नाम है गुरुतत्व: स्वामी डॉ. दीक्षानंद सरस्वती--मुख्य वक्ता के रूप में विदिशा स्थित योगाश्रम की स्वामी डॉ. दीक्षानंद सरस्वती जी ने कहा कि गुरुतत्व मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला समर्थ माध्यम है।"आत्मा से जागृत होने वाला विवेक ही वास्तविक गुरुतत्व है। इसे साधने के लिए ज्ञान, कर्म और भक्ति का संतुलन अनिवार्य है।"उन्होंने वर्तमान दौर पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज गुरु बनने की होड़ मची है, परंतु जो केवल बौद्धिक बातें करे और उसका आचरण विपरीत हो, वह गुरु नहीं हो सकता। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास, अध्ययन, सोने से पहले ध्यान और आहार पर संयम रखते हुए आध्यात्मिक यात्रा जारी रखने का संदेश दिया।

AI ज्ञान दे सकता है, व्यक्तित्व निर्माण नहीं: डॉ. अखिलेश कुमार सिंह--भोपाल की सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी के अधिष्ठाता डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने शिक्षक और गुरु का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षक केवल बौद्धिक शिक्षा प्रदान करता है। गुरु व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण और संस्कार प्रदान करता है।उन्होंने आगे कहा कि "गुरु कोई व्यक्ति नहीं बल्कि एक चेतना, तत्व और आत्म-प्रकाश का आश्रय है।" आज के तकनीकी युग का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ज्ञान का भंडार तो दे सकता है, लेकिन किसी मनुष्य के चरित्र व व्यक्तित्व का निर्माण नहीं कर सकता।

गुरु अनगढ़ को सुगढ़ बनाने वाला वैद्य है: डॉ. अरुण कुमार साव--सागर विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. अरुण कुमार साव ने कहा कि गुरु संसार रूपी समस्याओं का वैद्य है, जो अनगढ़ शिष्य को सुगढ़ बनाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि बाहर गुरु की खोज में भटकने के बजाय ईश्वर की तलाश करें और अपने भीतर की कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करें—यही सच्ची आध्यात्मिक साधना है।

​‘अपना दीपक स्वयं बनें’--कार्यक्रम का समापन योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र बाबू खत्री के आभार प्रदर्शन से हुआ। उन्होंने भगवान बुद्ध के उपदेश "अप्प दीपो भव" (अपना दीपक स्वयं बनें) का स्मरण कराते हुए कहा कि गुरुतत्व का केंद्र हमेशा शिष्य ही होता है।अंत में कार्यक्रम के संयोजक डॉ. श्याम गणपत तिखे ने सभी का धन्यवाद करते हुए अपने भीतर बैठे सदगुरु को जागृत करने का आह्वान किया।

 

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28