ट्रैन की चपेट में आने से युवक की दर्दनाक मौत, 2 घंटे तक रेलवे लाईन के बीच में पड़ा रहा शव
-शव के ऊपर से गुजरी कई ट्रैने, मानवता हुई शर्मसार
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र,)
शुक्रवार देर रात को सलामतपुर स्टेशन के घोड़ापछाड़ से लांबाखेड़ा रेल्वे लाइनों के बीच मानवता को शर्मसार करने वाला घटनाक्रम देखने को मिला, जहां एक युवक की देर रात ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो जाती है। लेकिन उसका शव लगभग दो घंटों तक रेलवे लाइनों के बीच में पड़ा रहता है और उसके ऊपर से कई ट्रेनें गुज़रती जाती हैं। मगर ज़िम्मेदार रेलवे अधिकारियों की नज़र युवक के शव पर पड़ने के बाद भी रेलवे लाईन के बीच से नही हटाया गया। और पुलिस के आने का इंतज़ार करते रहे। जिसकी वजह से युवक के शव के ऊपर से कई ट्रेनें गुज़र गई। सलामतपुर थाना प्रभारी दिनेश सिंह रघुवंशी ने जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार रात सलामतपुर स्टेशन मास्टर ने मेमो भेजकर सूचना देते हुए बताया कि घोड़ापछाड़ से लांबाखेड़ा के बीच खंबा नम्बर 868/6 से 8 के डाउन ट्रेक रेलवे लाइन पर किसी युवक की ट्रेन से कटकर मौत हो गई है। स्टेशन मास्टर को मालवा एक्सप्रेस ट्रेन के चालक ने रेलवे लाइनों के बीच शव पड़े होने की सूचना दी थी। जानकारी मिलते ही तत्काल एएसआई राजेश यादव, आरक्षक राहुल रघुवंशी और थाना मोबाइल चालक मूरत सिंह मौके पर पहुंचे और शव को रेलवे लाइनों के बीच से हटवाकर सांची स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम के लिए भेजा। 15 घंटे बाद भी शिनाख्त नही होने पर शनिवार दोपहर 1 बजे शव का पोस्टमार्टम किया गया। वहीं पुलिस ने मर्ग क्रमांक 12/26 का मामला दर्जकर जांच में लिया है।
नही हुई युवक की पहचान--- ट्रेन की चपेट में आने से जिस 45 से 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत हुई है। उसकी घटना के 15 घंटे बाद भी पहचान नही हो सकी है।क्योंकि युवक के पास से कोई भी ऐसा डॉक्यूमेंट नही मिला है जिससे उसकी पहचान हो सके और अभी यह भी पता नही चला है कि युवक ने ट्रेन के आगे आकर आत्महत्या की है या ट्रेन से गिरकर या टकराकर उसकी मौत हुई है। यह कह पाना भी अभी मुश्किल है। इस घटना की विवेचना के बाद ही मौत का सही कारण पता चल पाएगा। वहीं शनिवार दोपहर 1 बजे शव का पोस्टमार्टम सांची सिविल अस्पताल में किया गया।
स्टेशन पर नही रहते आरपीएफ जीआरपी के जवान --- सलामतपुर स्टेशन पर रेलवे पुलिस के आरपीएफ या जीआरपी के जवान मौजूद नही रहते हैं। जबकि यह स्टेशन दिल्ली मुंबई मेन रेलवे ट्रेक के बीच में पड़ने वाला स्टेशन है।यहां पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। जब कभी कोई ट्रेन से कट जाए या आत्महत्या कर ले। उस समय भी रेलवे पुलिस भोपाल या विदिशा से मोके पर आती है। जिसमें काफी समय लग जाता है। और इतने समय तक शव रेलवे लाइनों पर ही पड़ा रहता है। वहीं आसपास बस्तियों के ग्रामीण भी अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रेन के नीचे से निकलते हैं। इतना सब होने के बाद भी रेलवे विभाग का रवैया गैरज़िम्मेदाराना बना हुआ है।

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