-150 साल पुरानी पत्थर खदानों ने बदली गांव की तस्वीर, स्थानीय रोजगार से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बनाई पहचान

-डेढ़ सदी पुरानी खदानों से निकल रहा प्रीमियम सेंडस्टोन और लाइम स्टोन, करोड़ों के कारोबार के साथ सैकड़ों परिवारों की आजीविका का आधार बना गांव

अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र) 

सांची विश्व धरोहर स्तूपों और अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए दुनिया भर में पहचान रखता है, लेकिन इसी जनपद की ग्राम पंचायत मुरैलकलां आज अपनी 150 वर्ष पुरानी पत्थर खदानों के कारण अलग पहचान बना चुकी है। कभी स्थानीय निर्माण कार्यों तक सीमित रहने वाला यहां का पत्थर अब देश की बड़ी परियोजनाओं के साथ-साथ अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों की इमारतों तक पहुंच रहा है। समय के साथ आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रसंस्करण और व्यापारिक नेटवर्क ने इस पारंपरिक व्यवसाय को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बना दिया है। पत्थर उद्योग ने न केवल मुरैलकलां, बल्कि आसपास के गांवों के सैकड़ों परिवारों को रोजगार दिया है। डंपर चालक, मशीन ऑपरेटर, मजदूर, कारीगर और व्यापारी सभी इस उद्योग से जुड़े हैं। करोड़ों रुपए के सालाना कारोबार के साथ यह गांव आत्मनिर्भरता, ग्रामीण उद्यमिता और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का उदाहरण बनकर उभरा है। यही वजह है कि सांची जनपद का यह छोटा-सा गांव अब वैश्विक व्यापार के मानचित्र पर अपनी अलग पहचान दर्ज करा चुका है।

कई तरह के पत्थरों का खजाना-मुरैलकलां में पत्थर उत्खनन का इतिहास करीब डेढ़ सदी पुराना है। पीढ़ियों से चले आ रहे इस कार्य ने आज संगठित उद्योग का रूप ले लिया है। शुरुआती दौर में यहां से सामान्य निर्माण सामग्री निकाली जाती थी, लेकिन अब आधुनिक तकनीक के जरिए प्रीमियम गुणवत्ता का सेंडस्टोन, लाइम स्टोन, चाल्क स्टोन और स्लेट स्टोन तैयार किया जा रहा है। सेंडस्टोन अपनी मजबूती, आकर्षक बनावट और नक्काशी की क्षमता के कारण मूर्तियां, जाली, खंभे तथा सजावटी निर्माण में पसंद किया जाता है, जबकि लाइम स्टोन और अन्य पत्थरों का उपयोग भवन निर्माण और औद्योगिक कार्यों में बड़े पैमाने पर हो रहा है।

गुजरात से दुनिया तक पहुंचा मुरैलकलां का पत्थर---मुरैलकलां और मिर्जापुर क्षेत्र में वर्तमान में लगभग छह बड़ी सेंडस्टोन खदानें तथा सात से आठ सादा फर्शी पत्थर की खदानें संचालित हैं। यहां से निकला कच्चा पत्थर राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के व्यापारियों के माध्यम से बड़े प्रोसेसिंग केंद्रों तक पहुंचता है। गुजरात की कटिंग और रिफाइनिंग इकाइयों में तैयार होने के बाद यही पत्थर अमेरिका, चीन और जापान सहित कई देशों में निर्यात किया जाता है। उच्च गुणवत्ता और टिकाऊपन के कारण यहां का पत्थर अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार अपनी जगह मजबूत कर रहा है। इस कारोबार से हर वर्ष करोड़ों रुपए का व्यापार होता है और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28