​धान की रोपाई ठप होने से मजदूरों का रोजगार छिना; फसल सूखने की कगार पर पहुंचने से किसान भी गहरे संकट में

​अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एफिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

रायसेन जिले के सलामतपुर, बेरखेड़ी चौराहा, कुल्हाड़िया, दीवानगंज क्षेत्र में कमजोर मानसून ने भीषण संकट खड़ा कर दिया है। पर्याप्त बारिश न होने के कारण एक ओर जहाँ धान की रोपाई का काम लगभग ठप हो गया है, वहीं दूसरी ओर इसका सीधा असर बिहार से आए प्रवासी मजदूरों की आजीविका पर पड़ा है। हर साल की तरह इस बार भी बिहार से बड़ी संख्या में मजदूर धान रोपाई की उम्मीद में यहाँ पहुँचे थे, लेकिन बारिश न होने से उन्हें लगातार काम नहीं मिल पा रहा है।

आर्थिक तंगी से जूझ रहे मजदूर, कुछ की घर वापसी--रोजगार की आस में मध्य प्रदेश पहुँचे मजदूरों के सामने अब खाने-पीने और रहने का गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मजदूरों का कहना है कि जो थोड़े-बहुत पैसे वे अपने घर से बचाकर लाए थे, वे अब धीरे-धीरे रोज़मर्रा के खर्चों में खत्म हो रहे हैं। कई मजदूरों को हफ्ते में केवल एकाध दिन ही काम मिल पा रहा है। इस अनिश्चितता से निराश होकर कई श्रमिक वापस अपने गाँव लौट चुके हैं, जबकि कुछ मजदूर इस उम्मीद में रुकने को मजबूर हैं कि जल्द अच्छी बारिश होगी और रोपाई शुरू हो सकेगी।

खेतों में पड़ीं दरारें, पीले पड़ रहे धान के पौधे--​दूसरी ओर, क्षेत्र के किसानों की चिंता भी चरम पर है। जिन किसानों ने समय पर धान की पौध (नर्सरी) तैयार कर ली थी, उनकी फसल अब पानी के अभाव में सूखने लगी है। खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं और पौधे पीले पड़ रहे हैं। यद्यपि कुछ किसान ट्यूबवेल और निजी साधनों के सहारे सिंचाई की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लगातार गिरते जलस्तर के कारण यह पर्याप्त साबित नहीं हो पा रहा है। कई किसानों ने तो पानी की कमी को देखते हुए अब तक रोपाई शुरू ही नहीं की है। अब किसान और मजदूर—दोनों ही आकाश की ओर टकटकी लगाए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि खेतों में फिर से हरियाली लौट सके और ठप पड़ा रोजगार दोबारा शुरू हो सके।

इनका कहना है।

​"हम रोजगार की उम्मीद में बिहार से इतनी दूर आए थे, लेकिन बारिश न होने से काम पूरी तरह बंद है। जो जमा-पूंजी लाए थे, वह भी अब खाने-पीने में खत्म हो रही है। अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो हमें मजबूरन खाली हाथ घर लौटना पड़ेगा।"

शिव चरण, बिहार से आए मजदूर।

धान की नर्सरी तैयार है, लेकिन पानी के बिना रोपाई संभव नहीं हो पा रही है। ट्यूबवेल से सिंचाई कर फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, पर वह नाकाफी है। खेत सूख रहे हैं और पौधे पीले पड़ रहे हैं। अगर एक-दो दिन में तेज बारिश नहीं हुई, तो भारी नुकसान तय है।

मुनव्वर अली, स्थानीय किसान।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28