​सलामतपुर और आसपास के दर्जनों गांवों के किसान चिंतित, जल्द बारिश न होने पर भारी नुकसान की आशंका

​अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

​सलामतपुर सहित संपूर्ण क्षेत्र में पिछले करीब तीन हफ्तों (20 दिनों) से बादलों की बेरुखी ने अन्नदाताओं की कमर तोड़कर रख दी है। क्षेत्र में लगातार बारिश नहीं होने के कारण धान की खेती पर अब गहरा संकट मंडराने लगा है। आलम यह है कि तेज धूप और उमस के कारण खेतों की पूरी नमी गायब हो चुकी है और उपजाऊ जमीन में गहरी-गहरी दरारें पड़ने लगी हैं। जिन किसानों ने कड़ी मेहनत और भारी लागत लगाकर धान की रोपाई कर दी थी, अब उनके चेहरों पर मायूसी और चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। पानी के अभाव में हरे-भरे धान के पौधे अब धीरे-धीरे पीले पड़ने लगे हैं और सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं।

रुका पौधों का विकास, खाली पड़े हैं आधे से ज्यादा खेत--​कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान की फसल को शुरुआती चरण में भरपूर पानी की आवश्यकता होती है। पर्याप्त पानी न मिलने के कारण पौधों का विकास पूरी तरह से रुक गया है। वहीं दूसरी ओर, क्षेत्र का एक बड़ा रकबा अब भी खाली पड़ा हुआ है। बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जो अच्छी बारिश के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और रोपाई का काम शुरू भी नहीं कर पाए हैं। किसानों का मानना है कि जब तक पर्याप्त मानसूनी बारिश नहीं होती, तब तक सूखे खेतों में रोपाई करना नुकसान का सौदा साबित होगा। यदि अगले कुछ दिनों में मौसम मेहरबान नहीं हुआ, तो रोपाई का अनुकूल समय हाथ से निकल जाएगा, जिससे कुल उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।

सिंचाई के संसाधनों की कमी और मौसम पर निर्भरता-स्थानीय किसानों का कहना है कि सलामतपुर क्षेत्र में धान की खेती मुख्य रूप से वर्षा जल पर ही निर्भर है। नहरों और अन्य सिंचाई संसाधनों की सीमित उपलब्धता के कारण किसान पूरी तरह से प्रकृति के भरोसे हैं। लगातार सूखे के चलते पहले से लगाई गई फसल दम तोड़ रही है। किसानों ने बताया कि अगर जल्द ही झमाझम बारिश नहीं हुई, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा। पहले ही खाद, बीज और जुताई में हजारों रुपये खर्च हो चुके हैं, और अब पूरी फसल बर्बाद होने की कगार पर है।

 

​इन गांवों के किसानों की टिकी हैं आसमान पर निगाहें -

​सूखे की यह भयावह स्थिति केवल सलामतपुर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी हाहाकार मचा हुआ है। वर्तमान में

​सलामतपुर, दीवानगंज और बेरखेड़ी चौराहा,जमुनिया, कायमपुर, नीनोद और बेसर, सेमरा, सरार, अम्बाडी, मुश्काबाद और करैया, हलाली डेम और खोहा

​इन सभी क्षेत्रों के किसानों की निगाहें अब केवल आसमान पर टिकी हैं। हर गुजरते दिन के साथ किसानों की धड़कनें तेज हो रही हैं। वे भगवान से जल्द से जल्द अच्छी और जोरदार बारिश की प्रार्थना कर रहे हैं ताकि सूख रही फसलों को जीवनदान मिल सके और खाली पड़े खेतों में समय रहते रोपाई का काम पूरा किया जा सके।

 

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28