-​सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल: 20 साल से बंद पड़ी करोड़ों की मशीनरी पर कबाड़ियों की नजर, मिलीभगत से भोपाल जा रहा माल।

​-हाल ही में हुई थी कार्रवाई: 7 महिलाओं समेत 8 आरोपी चोरी के स्क्रैप के साथ रंगे हाथों पकड़े गए थे, फिर भी नहीं थम रहीं वारदातें।

​अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

​लगभग दो दशक पहले जब सलामतपुर की प्रसिद्ध सूर्या फैक्ट्री चालू हुई थी, तब इसने क्षेत्र के हजारों युवाओं को रोजगार की उम्मीद दी थी। लेकिन 20 साल पहले अचानक लगे ताले ने न केवल हजारों परिवारों को बेरोजगारी के अंधकार में धकेल दिया, बल्कि अब यह बंद पड़ी संपत्ति अपराध और चोरी का गढ़ बन चुकी है। फैक्ट्री परिसर में आज भी करोड़ों रुपये मूल्य की कीमती मशीनें, भारी-भरकम मोटरें और दुर्लभ औजार लगे हुए हैं। हालांकि, देखरेख के अभाव और मिलीभगत के चलते इस बहुमूल्य राष्ट्रीय संपत्ति को धीरे-धीरे स्क्रैप में बदलकर बेचा जा रहा है। स्थानीय सूत्रों और निवासियों का कहना है कि अब तक लाखों रुपये का पुराना लोहा, एल्युमिनियम और तांबा ट्रकों में भरकर भोपाल के कबाड़खानों तक पहुंचाया जा चुका है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात होने के बावजूद चोरी का यह सिलसिला थम क्यों नहीं रहा?

ऑटो से स्क्रैप चुराकर भाग रही थीं महिलाएं को दबोचा था पुलिस ने--फैक्ट्री में हो रही सेंधमारी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ समय पहले ही स्थानीय निवासियों की सतर्कता और पुलिस की मुस्तैदी से एक बड़ा गिरोह पकड़ा गया था। कबाड़ और पन्नी बीनने का काम करने वाली 7 महिलाएं एक लोडिंग ऑटो (क्रमांक MP04 एलडी 7941 में भारी मात्रा में एल्युमिनियम व लोहे की टीन भरकर भोपाल रोड की ओर भाग रही थीं।सलामतपुर पुलिस ने कचनारिया गांव के पास घेराबंदी कर ऑटो को रोका और मौके से चोरी का माल बरामद किया। इस मामले में पुलिस ने धारा 331(2) और 305(ए) BNS के तहत मामला दर्ज कर ऑटो चालक राजदीप कोली समेत 7 महिलाओं रक्षा नाथ, काजल गिरी, करीना गिरी, देवकी, भारती, मोनिका गिरी और अनिता बाई गिरी सभी निवासी गोसाईं मोहल्ला, दीवानगंज को गिरफ्तार किया था।

सुरक्षा व्यवस्था और गार्डों की भूमिका संदेहास्पद--इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी सूर्या फैक्ट्री में चोरियों पर पूर्ण विराम नहीं लग सका है। परिसर की सुरक्षा के नाम पर तैनात गार्डों की मौजूदगी में लगातार हो रही वारदातें अब जांच का विषय बन चुकी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना अंदरूनी सांठगांठ के इतनी भारी-भरकम मशीनरी और स्क्रैप को बाहर निकालना मुमकिन नहीं है। पुलिस और प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सुरक्षा एजेंसी की जवाबदेही तय करनी होगी।

इनका कहना है।

​कस्बे की सूर्या फैक्ट्री बंद होने के बाद से ही क्षेत्र में बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है। एक तरफ स्थानीय लोग काम के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ फैक्ट्री के अंदर लगी कीमती मशीनरी की खुलेआम चोरी हो रही है। गार्डों की तैनाती के बाद भी ऐसी वारदातें होना सुरक्षा व्यवस्था पर सीधे सवालिया निशान खड़ा करती हैं।

सुरेंद्र मेहरा, अध्यक्ष, बेरोजगार मजदूर संगठन, सलामतपुर।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28