अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

भोपाल-विदिशा स्टेट हाईवे 18 और नेशनल हाईवे 146 इन दिनों सफर के लिए सुरक्षित नहीं रह गए हैं। वाहनों की बेकाबू रफ्तार और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते भारी वाहन रोजाना हादसों को न्योता दे रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार की शिकायतों और लगातार हो रही मौतों के बाद भी जिम्मेदार विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। वहीं पुलिस और आरटीओ की टीम सिर्फ रस्म अदायगी और कथित अवैध वसूली में व्यस्त है, जिससे वाहन चालकों के हौसले बुलंद हैं।

रोजाना दौड़ती हैं सैकड़ों बसें, चार्टर्ड और डंपर बने काल--भोपाल विदिशा स्टेट हाईवे 18 पर यातायात का दबाव दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इस मार्ग से हर दिन लगभग 100 से अधिक यात्री बसें गुजरती हैं। इनमें विदिशा, भोपाल, रीवा, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, बीना, ललितपुर और झाँसी से इंदौर की ओर जाने वाली हाई-स्पीड चार्टर्ड बसें शामिल हैं, जो हाईवे पर अंधी रफ्तार से दौड़ती हैं। ​सिर्फ बसें ही नहीं, बल्कि ओवरलोड डंपर, ईंटें ढोने वाले मिनी ट्रक (407) और बड़े-बड़े डीजल टैंकर भी इस सड़क पर रेस लगाते नजर आते हैं। इन भारी वाहनों की गति इतनी तेज होती है कि सामने से आने वाले छोटे वाहन चालकों या पैदल यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। यही कारण है कि इस मार्ग पर आए दिन रोंगटे खड़े कर देने वाली दुर्घटनाएं हो रही हैं।

कुछ दिन पूर्व ​पुलिया की रेलिंग पर अटका टैंकर, टला था बड़ा हादसा--हाईवे पर रफ्तार के इस खूनी खेल का ताजा उदाहरण कुछ दिन पूर्व ही रात को नेशनल हाईवे 146 पर देखने को मिला था। यहाँ एक तेज रफ्तार डीजल टैंकर के सामने अचानक एक बाइक सवार आ गया। बाइक सवार को बचाने के चक्कर में टैंकर चालक ने अचानक वाहन मोड़ दिया, जिससे अनियंत्रित होकर टैंकर सीधे पुलिया की रेलिंग पर जा अटक गया था। ​गनीमत यह रही थी कि टैंकर पलटा नहीं और कोई बड़ा विस्फोट या रिसाव नहीं हुआ, अन्यथा हाईवे पर एक बड़ी मानवीय त्रासदी हो सकती थी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर टैंकर की रफ्तार नियंत्रित होती, तो यह स्थिति निर्मित ही नहीं होती।

चौथ वसूल' में व्यस्त जिम्मेदार, ग्रामीणों में आक्रोश--स्थानीय निवासियों का गुस्सा अब फूटने लगा है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पुलिस और यातायात विभाग हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के बजाय सिर्फ 'चौथ वसूली' (अवैध उगाही) में लगा रहता है। नाकों और चौकियों पर केवल कागजी खानापूर्ति कर ड्यूटी पूरी कर ली जाती है। ओवरस्पीडिंग मापने वाले रडार या स्पीड गवर्नर की चेकिंग न के बराबर है। शासन-प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।

क्या होना चाहिए समाधान? (मुख्य मांगें)

​ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है।

​1-स्पीड ब्रेकर और साइन बोर्ड: हाईवे के संवेदनशील मोड़ों और रिहायशी इलाकों के पास गति अवरोधक (स्पीड ब्रेकर) और साइन बोर्ड लगाए जाएं।

​2-इंटरसेप्टर वाहनों की तैनाती: ओवरस्पीडिंग करने वाले वाहनों को पकड़ने के लिए स्पीड गन के साथ पुलिस की टीमें तैनात हों।

​3-सख्त चालानी कार्रवाई: तय सीमा से अधिक गति से चलने वाली बसों और डंपरों के परमिट निरस्त किए जाएं और भारी जुर्माना लगाया जाए।​यदि समय रहते प्रशासन ने इस खूनी हाईवे पर नियंत्रण नहीं पाया, तो स्थानीय ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

इनका कहना है।

क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों ने जताई चिंता

​"भोपाल-विदिशा स्टेट हाईवे 18 और एनएच 146 पर तेज रफ्तार वाहनों के कारण दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मासूम लोग अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। शासन-प्रशासन को अब तो नींद से जागना चाहिए और ऐसे खूनी रफ्तार वाले वाहनों पर सख्त चालानी कार्रवाई करनी चाहिए।"

कैलाश गोस्वामी, समाजसेवी (रातातलाई)

​शुक्रवार रात को हुआ टैंकर हादसा एक बड़ा चेतावनी संकेत है। अगर विभाग ने अब भी तेज रफ्तार वाहनों और ओवरलोडिंग पर लगाम नहीं कसी, तो किसी दिन बहुत बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। ट्रैफिक पुलिस को सिर्फ खड़ा नहीं रहना चाहिए, बल्कि एक्शन लेना चाहिए।"

वहीद खान, वरिष्ठ पत्रकार।

 

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28