-सांची से भी सुंदर बौद्ध स्थल उपेक्षा का शिकार: रविवार को भोपाल, विदिशा, सीहोर और रायसेन से जुटती है भारी भीड़, पर पर्यटन विभाग बेखबर

-​पूर्व कलेक्टर के निर्देशों की उड़ी धज्जियां: सोलर सीसीटीवी कैमरे और इमरजेंसी नंबरों के बोर्ड लगाने के आदेश फाइलों में दबे​

​अदनान खान, सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

​विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शुमार और ऐतिहासिक महत्व से समृद्ध सतधारा बौद्ध स्तूप क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से यहां आने वाले पर्यटकों की जान जोखिम में बनी हुई है। रायसेन जिले के सलामतपुर क्षेत्र में स्थित इस पुरातात्विक स्थल पर सुरक्षा की दृष्टि से बेहद जरूरी सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगाए गए हैं। शनिवार और रविवार को राजधानी भोपाल, विदिशा, सीहोर, रायसेन सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों पर्यटक परिवार के साथ यहां पिकनिक मनाने और ऐतिहासिक स्तूपों को देखने पहुंचते हैं। इसके बावजूद पर्यटन विभाग और संबंधित प्रशासन पर्यटकों की सुरक्षा और मौलिक सुविधाओं को लेकर पूरी तरह से लापरवाह बना हुआ है। मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा उपायों के अभाव के चलते स्थानीय निवासियों और पर्यटकों में शासन-प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।

जंगलों से घिरा हुआ है स्तूप परिसर, जंगली जानवरों का डर--

व​र्तमान में सतधारा स्तूप परिसर में करीब आधा दर्जन कर्मचारी तैनात हैं, जिनमें से कुछ स्थाई हैं और कुछ को दैनिक वेतन (डेली वेज) पर रखा गया है।उल्लेखनीय है कि सतधारा स्तूप का पूरा परिसर घने जंगल क्षेत्र से घिरा हुआ है। ऐसे में सुरक्षा घेरा मजबूत न होने और सीसीटीवी कैमरे न होने के कारण यहां न केवल असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होने का डर बना रहता है, बल्कि हिंसक जंगली जानवरों का खतरा भी हर समय मंडराता रहता है। इसके बावजूद पर्यटन और पुरातत्व विभाग आंखें मूंदे बैठा है।

कलेक्टर के आदेश भी बेअसर, फाइलों में सिमटी सोलर सीसीटीवी योजना--रायसेन जिले के तत्कालीन कलेक्टर अरविंद दुबे की अध्यक्षता में 18 सितंबर 2024 को जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सतधारा सहित जिले के अन्य पुरातात्विक स्थलों पर पर्यटन को बढ़ावा देने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई थी।तत्कालीन कलेक्टर ने सांची क्षेत्र में डिस्प्ले बोर्ड लगाकर आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों की दूरी, मार्ग और जानकारी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा कर्क रेखा स्थल पर सेल्फी पॉइंट विकसित करने और सतधारा में सुरक्षा के लिहाज से सोलर एनर्जी से संचालित सीसीटीवी कैमरे लगाने पर सहमति बनी थी। पर्यटकों की मदद के लिए जगह-जगह इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों के बोर्ड लगाने के स्पष्ट आदेश दिए गए थे। हालांकि, महीनों बीत जाने के बाद भी स्तूप परिसर में न तो कोई सीसीटीवी कैमरा लगा और न ही सुरक्षा बोर्ड दिखाई देते हैं।

अंधेरे में डूबा परिसर, 1 करोड़ की सड़क भी हुई जर्जर--भोपाल विदिशा स्टेट हाईवे-18 से सतधारा स्तूपों की दूरी लगभग 7 किलोमीटर है। पर्यटकों के सुगम आवागमन के लिए नहर के किनारे 1 करोड़ रुपये की लागत से सीमेंट-कंक्रीट (सीसी) रोड का निर्माण कराया गया था। रख-रखाव के अभाव में यह सड़क अब जगह-जगह से जर्जर हो चुकी है, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।इसके अलावा सतधारा स्तूप परिसर में बिजली कनेक्शन तक नहीं है। रात के समय पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है और सुरक्षा व्यवस्था महज कुछ सोलर लाइटों के सहारे टिकी रहती है। बिजली, नेटवर्क और संचार सुविधाओं के अभाव में आपातकालीन स्थिति में मदद पाना बेहद कठिन हो जाता है।

यूनेस्को जीर्णोद्धार पर उठा चुका है सवाल, उपेक्षा की शिकार धरोहर----सतधारा स्तूपों के प्रचार-प्रसार और विकास को लेकर पुरातत्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। वर्ष 1999 में यूनेस्को द्वारा प्राप्त राशि से यहां जीर्णोद्धार कार्य कराया गया था, लेकिन निर्माण कार्य बेहद गुणवत्ताहीन रहा। वर्ष 2005 में यूनेस्को के विशेषज्ञों के दल ने निरीक्षण के दौरान असंतोष जताते हुए घटिया निर्माण को तोड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए थे।पहले यह क्षेत्र वन विभाग के अधीन था और बाद में इसे एएसआई को ट्रांसफर किया गया। पुरातत्व विभाग द्वारा कई बार पत्राचार किए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। सांची स्तूप से भी अधिक शांत और सुंदर प्राकृतिक वातावरण होने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यह स्थल अपनी पहचान बनाने के लिए तरस रहा है।

सम्राट अशोक कालीन इतिहास: उत्खनन में मिले थे अस्थि अवशेष--​हलाली नदी के दाहिने किनारे पहाड़ी पर स्थित यह बौद्ध स्मारक 272-238 ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा निर्मित कराया गया था। उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए सांची स्तूप के निर्माण के साथ ही सतधारा में ईंटों के स्तूप का निर्माण कराया था। इस ऐतिहासिक स्थल की खोज प्रसिद्ध पुरातत्वविद अलेक्जेंडर कनिंघम ने की थी। ​इस परिसर में छोटे-बड़े कुल 27 स्तूप, दो बौद्ध विहार और एक चैत्य मौजूद है। वर्ष 1989 में इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया था। उत्खनन के दौरान यहां भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों - सारिपुत्र और महामोद्गल्यायन (महागोपालन) के पवित्र अस्थि अवशेष मिले थे। परिसर के शैलचित्रों में बुद्ध का व्यक्ति चित्र, अलंकृत वैदिक स्तंभ, दानदाताओं के अभिलेख और गुप्तकालीन वास्तुकला के अवशेष विद्यमान हैं। मौर्य काल में विकसित हुआ यह केंद्र समय के साथ उपेक्षा का शिकार होता चला गया।

इनका कहना है।

​बिजली विभाग को नहीं मिला आवेदन।

सतधारा स्तूप क्षेत्र में वर्तमान में बिजली की व्यवस्था नहीं है। पुरातत्व विभाग की ओर से कभी भी लाइट कनेक्शन के लिए विद्युत वितरण कंपनी को आवेदन ही नहीं दिया गया है। यदि विभाग आवेदन करे तो नजदीकी गांव गाडरखेड़ी से महज 5 से 6 पोल लगाकर स्तूप परिसर तक आसानी से बिजली पहुंचाई जा सकती है।

मनीष श्रीवास्तव, जेई सांची-सलामतपुर

​सुरक्षा को लेकर दिए गए निर्देश

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार सतधारा स्तूप क्षेत्र में समय समय पर पुलिस बल भेजकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया जाता है। वहां तैनात कर्मचारियों से जानकारी ली जाती है।साथ ही उनको परिसर में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति के दिखने पर तुरंत थाने को सूचित करने की हिदायत दी गई है।

श्यामराज सिंह सोमवंशी, थाना प्रभारी सलामतपुर।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28