-सुकासेन सहित आधा दर्जन गांवों की पक्की सड़क की आस टूटी

​अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

डिजिटल इंडिया और चौतरफा विकास के सरकारी दावों के बीच राजधानी भोपाल के मुहाने पर बसे आधा दर्जन गांवों के हजारों लोग आज भी एक अदद पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं। यह दर्द किसी दूर-दराज के दुर्गम पहाड़ी इलाके का नहीं, बल्कि भोपाल-विदिशा हाईवे-18 से महज 2.5 किलोमीटर दूर स्थित रातातलाई पंचायत के सुकासेन मार्ग का है। साल 2015 से लेकर आज (2026) तक, पिछले 11 वर्षों से इस क्षेत्र की मुख्य सड़क पूरी तरह बदहाल और कीचड़ में तब्दील हो चुकी है, लेकिन शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि पूरी तरह मूकदर्शक बने हुए हैं।

बारिश आते ही कट जाता है संपर्क, 'टापू' बन जाते हैं गाँव---मानसून की शुरुआत होते ही सुकासेन, सुआखेड़ी, भोई कॉलोनी, बेसर और कटसारी जैसे गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क कट जाता है। ढाई किलोमीटर का यह कच्चा रास्ता हर साल पानी और कीचड़ के दलदल में बदल जाता है। सड़क पर इतने गहरे और जानलेवा गड्ढे हो गए हैं कि बारिश का पानी भरने के बाद चालकों को गहराई का अंदाज़ा ही नहीं लगता। इसके चलते रोजाना दोपहिया वाहन चालक अनियंत्रित होकर गिर रहे हैं और आए दिन लोग लहूलुहान हो रहे हैं। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और रोज़मर्रा के काम पर निकलने वाले ग्रामीणों के लिए यह सफर किसी दुःस्वप्न जैसा हो गया है।

सरकारी तंत्र फेल: चंदा इकट्ठा कर खुद गड्ढे भरने को मजबूर ग्रामीण--​प्रशासनिक उपेक्षा और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी से तंग आकर अब ग्रामीणों ने अपनी व्यवस्था खुद संभालने का फैसला किया है। जब सड़क चलने लायक नहीं रहती, तब आधा दर्जन गांवों के लोग आपस में चंदा (पैसा) जमा करते हैं। इस राशि से ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए मुरम और कंक्रीट मटेरियल मंगाया जाता है और ग्रामीण स्वयं फावड़ा उठाकर गड्ढों को भरते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर वे खुद यह काम न करें, तो प्रसव पीड़ा से जूझती महिलाओं या गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाना भी नामुमकिन हो जाएगा। एम्बुलेंस गांव तक आने से मना कर देती है। चंदा देकर सड़क सुधारना इस बात का जीता-जागता सबूत है कि ज़मीनी स्तर पर सरकारी तंत्र किस कदर नाकाम साबित हो रहा है।

कब जागेगा कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन?----भोपाल और विदिशा को जोड़ने वाले मुख्य हाईवे के इतने करीब होने के बावजूद आधा दर्जन गांवों की लाइफलाइन कही जाने वाली सड़क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है, या इस खबर के बाद जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि जागेंगे?

इनका कहना है।

"सुकासेन मार्ग की स्थिति वास्तव में बेहद खराब है और ग्रामीणों की परेशानी जायज है। पंचायत स्तर पर उपलब्ध सीमित संसाधनों से हम समय-समय पर अस्थाई सुधार करवाते हैं। हाल ही में गांव में नालियों का निर्माण कराया गया है। सड़क के डामरीकरण के लिए लोक निर्माण विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार मांग पत्र भेजे जा चुके हैं। बजट स्वीकृत होते ही काम प्राथमिकता से कराया जाएगा।"

रघुवीर सिंह मीणा, सरपंच, रातातलाई पंचायत।

"यह प्रशासन का घोर फेलियर है"

​"हाईवे से सिर्फ ढाई किलोमीटर दूर बसे गांवों के लोग 11 साल से नरकीय जीवन जी रहे हैं। ग्रामीणों का चंदा कर सड़क पर मुरम डलवाना शर्मनाक है। अगर जल्द काम शुरू नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।"

हमज़ा जाफ़री, पूर्व उपसरपंच, सुनारी सलामतपुर।

"चुनाव खत्म होते ही वादे भूल जाते हैं नेता"

​"2015 से यह सड़क बदहाल है। चुनाव आते ही नेता वोट मांगने आते हैं और झूठे वादे करते हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, मरीज तड़पते हैं। अब हम आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।"

नीरज जैन (बंटी भैया), कांग्रेस नेता।

​"आए दिन हादसे, संज्ञान ले प्रशासन"

​"गड्ढों में पानी भरने से रोजाना लोग चोटिल हो रहे हैं। सुआखेड़ी, बेसर, कटसारी का सलामतपुर से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेकर काम शुरू कराना चाहिए।"

गुफ़रान अहमद जाफ़री, स्थानीय किसान।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28