अपराधियों की नजर मेट्रो की नसों पर, सिंडिकेट तोड़ने की तैयारी
दिल्ली-एनसीआर। की लाइफलाइन कही जाने वाली दिल्ली मेट्रो की रफ्तार पर चोरों की नजर है। मेट्रो के सिग्नलिंग, ट्रैक्शन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम को जोड़ने वाली केबल, जिन्हें सिस्टम की नसें कहा जाता है, अब शातिर चोरों का आसान निशाना बन रही हैं। पिछले करीब 11 महीनों (1 अप्रैल 2025 से 13 मार्च 2026 तक) के आंकड़ों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। इस दौरान पूरे नेटवर्क पर केबल चोरी की 58 बड़ी वारदातें दर्ज की गई हैं। इन चोरियों ने न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाया है, बल्कि लाखों यात्रियों के सफर में भी ब्रेक लगाने का काम किया है। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने अब अपनी रणनीति को डिफेंस से बदलकर अटैक मोड में डाल दिया है। विभाग के सुरक्षा बेड़े में एक स्पेशल इंटेल यूनिट को तैनात किया है, जिसका एकमात्र काम इन वारदातों के पीछे छिपे सिंडिकेट की कुंडली खंगालना है।
चोरों का प्रोफाइल और रिसीवर पर नजर
डीएमआरसी की यह नई इंटेल यूनिट केवल पटरियों पर गश्त नहीं करेगी, बल्कि यह एक हाई-टेक डेटाबेस तैयार कर रही है। इसमें पुराने अपराधियों, उनके सहयोगियों और चोरी का माल खरीदने वाले कबाड़ियों का पूरा रिकॉर्ड होगा। सूत्रों के अनुसार, यह यूनिट दिल्ली पुलिस की विभिन्न विंग्स और पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर रियल-टाइम सूचनाएं साझा कर रही है। मकसद साफ है, सिर्फ तार काटने वाले को ही नहीं, बल्कि उस पूरे बाजार को खत्म करना जहां ये कीमती केबल बेचे जाते हैं। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो चोरों का सबसे ज्यादा ध्यान ट्रैक्शन केबल पर रहा है, जिसके चोरी होने के 33 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा 16 मामले सिग्नलिंग और 9 मामले इलेक्ट्रिकल केबल के हैं। बता दें कि परिचालन के दौरान (रेवेन्यू आवर्स) जब ट्रेनें हर 3-5 मिनट के अंतराल पर चलती हैं, तब इन केबलों को बदलना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा होता है। एक छोटी सी केबल कटने से पूरा सिग्नलिंग सिस्टम ठप होता है, इससे ट्रेनों की आवाजाही पर सीधा असर पड़ता है।
चोरी राेकने के लिए कई कदम उठाए
चोरियों को रोकने के लिए डीएमआरसी ने 14 प्रमुख कदम उठाए हैं। संवेदनशील इलाकों में सिग्नलिंग केबलों की सीमेंटिंग कर दी गई है और एंटी-थेफ्ट क्लैंप लगाए गए हैं। बाहरी घुसपैठ रोकने के लिए अलाइनमेंट के पास पेड़ों की छंटाई और कॉन्सर्टिना वायर (कंटीले तार) का जाल बिछाया गया है। रात के समय जब परिचालन बंद होता है, तब निजी सुरक्षा गार्डों और दिल्ली मेट्रो रेल पुलिस की संयुक्त टीमें नाइट पेट्रोलिंग के जरिए हर इंच ट्रैक की निगरानी करती हैं। इसके साथ ही पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ अब नरमी नहीं बरती जाएगी। डीएमआरसी ने स्पष्ट किया है कि एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता के साथ-साथ मेट्रो रेल (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) एक्ट 2002 की उन कठोर धाराओं को शामिल किया जा रहा है, जिनमें जमानत मिलना मुश्किल होता है। इतना ही नहीं, अदालतों में पैरवी के लिए वकीलों का एक विशेष पैनल तैयार किया गया है, जो सरकारी वकीलों के साथ मिलकर इन अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए काम करेगा।
ये हैं आंकड़े...
कुल केस : 58 (01 अप्रैल 2025-13 मार्च 2026)
- ट्रैक्शन केबल चोरी : 33 मामले
- सिग्नलिंग केबल चोरी : 16 मामले
- इलेक्ट्रिकल केबल चोरी : 09 मामले
- केबल कटने से सिग्नल फेल होते हैं, जिससे ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बिगड़ती है।
- 3-5 मिनट के अंतराल में केबल बदलना असंभव है, इसलिए रात के 2:00 से 4:00 बजे के बीच ही बड़ा काम हो पाता है

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