चयनित शिक्षकों ने भर्ती प्रक्रिया में देरी पर जताई नाराजगी
भोपाल: नियुक्ति की आस में चयनित शिक्षकों का धैर्य टूटा, डीपीआई के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की सुस्त रफ़्तार ने प्रदेश के हजारों युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में अपनी योग्यता साबित कर चुके सैकड़ों अभ्यर्थियों ने बुधवार को राजधानी भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) का घेराव किया। लंबे समय से चयन सूची में नाम होने के बावजूद नियुक्ति आदेश जारी न होने से नाराज इन उम्मीदवारों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार ने तत्काल जॉइनिंग की प्रक्रिया शुरू नहीं की, तो वर्तमान में चल रहा यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन आने वाले दिनों में एक व्यापक और उग्र आंदोलन का रूप ले लेगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन की होगी।
चयन सूची के नौ महीने बाद भी अधर में लटकी भर्ती प्रक्रिया
प्रदेश के करीब 10 हजार 700 चयनित उम्मीदवारों के लिए इंतजार का यह दौर बेहद कष्टकारी साबित हो रहा है। इस भर्ती अभियान की नींव वर्ष 2022 में रखी गई थी, जिसके बाद 2023 में पात्रता और फिर 2025 में चयन परीक्षा का आयोजन किया गया था। विडंबना यह है कि सितंबर 2025 में परीक्षा परिणाम और चयन सूची जारी होने के बावजूद नौ महीने बीत गए हैं, लेकिन विभाग ने अब तक नियुक्ति की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। भर्ती प्रक्रिया के अंतिम चरण में आकर इस तरह के ठहराव ने उन युवाओं की उम्मीदों को तोड़ दिया है जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर मेरिट सूची में स्थान बनाया था।
विभागीय नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जॉइनिंग के मामले में स्थापित नियमों को ताक पर रख दिया गया है। परीक्षा संचालन नियम पुस्तिका के अनुसार, अंतिम चयन सूची जारी होने के तीन माह के भीतर नियुक्ति आदेश जारी किया जाना अनिवार्य है, लेकिन यहां आठ से नौ महीने गुजर जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। चयनित शिक्षकों की शिकायत है कि विभाग ने अब तक न तो पात्र-अपात्र उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक की है और न ही चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया शुरू की गई है। जब भी उम्मीदवार अधिकारियों से मिलने पहुंचते हैं, तो उन्हें केवल आश्वासनों का झुनझुना थमा दिया जाता है, जिससे उनके बीच अविश्वास की भावना गहराती जा रही है।
आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से जूझ रहे मध्य प्रदेश के भावी शिक्षक
वर्षों से खिंच रही इस भर्ती प्रक्रिया ने युवाओं के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। प्रदर्शन में शामिल कई उम्मीदवार बेहद साधारण और गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं, जिनके लिए यह नौकरी केवल करियर नहीं बल्कि जीवनयापन का एकमात्र सहारा है। नियुक्ति में हो रही देरी के कारण कई अभ्यर्थी कोचिंग पढ़ाकर या अन्य छोटे-मोटे कार्य करके किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। लंबे इंतजार और अनिश्चितता ने इन युवाओं को न केवल आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है, बल्कि वे भारी मानसिक बोझ तले दब गए हैं, जिससे उनमें भारी हताशा व्याप्त है।

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