8 दिन की मेहनत, एक अनूठी साड़ी: जानिए कैसे तैयार होता है दुनिया का सबसे मजबूत प्राकृतिक सिल्क।
छत्तीसगढ़ के 'कोसा सिल्क' की वैश्विक चमक, पारंपरिक कारीगरी ने विदेशों में बनाई पहचान
रायपुर: छत्तीसगढ़ अपनी विशिष्ट परंपराओं और समृद्ध संस्कृति के लिए विश्वविख्यात है। इसी कड़ी में प्रदेश के कोसा सिल्क ने अपनी अनोखी बनावट और गुणवत्ता के दम पर देश-विदेश में एक बड़ी पहचान स्थापित की है। छत्तीसगढ़ में कोसा का उत्पादन मुख्य रूप से कुछ विशेष क्षेत्रों में होता है, जहाँ पारंपरिक कारीगर पीढ़ियों से इस दुर्लभ कला को जीवित रखे हुए हैं।
कोसा के प्रमुख केंद्र: प्रदेश के कोरबा और जांजगीर-चांपा जिले कोसा सिल्क के निर्माण के मुख्य केंद्र हैं। अपने विशिष्ट टेक्सचर और प्राकृतिक चमक के कारण यह रेशम पूरी दुनिया में सराहा जाता है। परंपरागत रूप से तैयार होने वाले इस रेशम को 'कोसा, कांस और कंचन' जैसी विशिष्ट श्रेणियों में पहचाना जाता है।
निर्माण की जटिल प्रक्रिया: कोसा सिल्क तैयार करने की प्रक्रिया अत्यंत धैर्य और परिश्रम की मांग करती है:
-
सर्वप्रथम जंगलों से तितलियों के लार्वा द्वारा निर्मित कोकून को एकत्रित किया जाता है।
-
बेहतर गुणवत्ता वाले कोकून को चुनकर उन्हें उबाला जाता है, जिससे रेशम का धागा अलग होता है।
-
लगभग 7 से 8 कोकून के मेल से एक लंबा धागा तैयार होता है, जिसे बाद में प्राकृतिक रंगों से रंगा जाता है।
-
धागे सूखने के बाद उनकी गड्डियां बनाई जाती हैं और फिर बुनकर इन्हें साड़ियों का रूप देते हैं।
-
एक कोसा साड़ी को पूरी तरह तैयार करने में कारीगरों को 7 से 8 दिन का समय लगता है।
हस्तशिल्प की अनूठी विशेषता: कोसा सिल्क अपनी असाधारण मजबूती, कोमलता और प्राकृतिक आभा के लिए विख्यात है। हाथों से बुना गया यह कपड़ा न केवल टिकाऊ होता है, बल्कि पहनने में भी बेहद आरामदायक होता है। स्थानीय कारीगरों के बारीक हुनर ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी धाक जमा ली है। विदेशी पर्यटकों के बढ़ते आकर्षण और बढ़ते निर्यात के कारण छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क आज सीमाओं को पार कर वैश्विक स्तर पर अपनी खूबसूरती का परचम लहरा रहा है।

सलामतपुर में निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन, 175 लोगों का परीक्षण, 60 लोगों को किये चश्मे के नंबर प्रदान
गाय वापस मांगने पर मामा भांजों में विवाद, लोहे की रॉड से हमला
1 मई अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर विशेष : हर हाथ को काम, हर श्रमिक को सम्मान: विष्णु देव सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूँ उपार्जन केन्द्रों का किया आकस्मिक निरीक्षण
दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना से सावित्री को मिला संबल
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की संवेदनशील पहल
राज्य सरकार धर्म-संस्कृति की धारा को प्रवहमान बनाए रखने के लिए सतत् सक्रिय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
छत्तीसगढ़ एकलव्य विद्यालय की बड़ी उपलब्धि
पुलिस मुख्यालय परिवार द्वारा 11 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दी गई भावभीनी विदाई