-रामायण के साथ-साथ यहाँ पिछले 28 वर्षों से जल रही है अखंड ज्योति

-एनएच 146 और स्टेट हाइवे 18 के जोड़ पर बसा हुआ है त्रिमूर्ति चौराहा

-त्रिमूर्ति चौराहे के शिव शक्ति हनुमान मंदिर में 28 सालों से निरंतर 24 घंटे चल रहा है रामायण पाठ

अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

रायसेन जिले के सांची जनपद अंतर्गत मेढ़की ग्राम पंचायत के त्रिमूर्ति चौराहा स्तिथ शिव शक्ति हनुमान मंदिर में 28 सालों से लगातार रामायण पाठ का आयोजन हो रहा है। यह आध्यात्मिक परंपरा ग्रामीणों की अटूट भक्ति और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के प्रति समर्पण का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। हर दिन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक और रात 8 बजे से मंदिर परिसर में रामचरितमानस का पाठ शुरू होता है, जो 24 घंटे तक चलता रहता है। इस पाठ में सैकड़ों भक्त शामिल होते हैं, जो भक्ति भजन और कीर्तन के माध्यम से श्रीराम के जीवन आदर्शों को आत्मसात करते हैं।

यह परंपरा मकरसंक्रांति के पावन पर्व पर 14 जनवरी वर्ष 1998 में शुरू हुई थी, जब ढकना पंचायत के स्थानीय निवासी रोशन सिंह राजपूत और उनकी मित्र मंडली ने पहली बार रामायण पाठ का आयोजन किया। तब से यह सिलसिला कभी रुका नहीं। चाहे बारिश हो, धूप हो या ठंड का मौसम, मेढ़की, ढकना चपना, त्रिमूर्ति चौराहा और आसपास क्षेत्र के निवासी हर परिस्थिति में मंदिर पहुंचते हैं। 

4 पंडितों द्वारा किया जाता है पाठ--वर्तमान में पाठ का संचालन 4 पंडितों नवल किशोर शर्मा, पंडित आशीष शर्मा, पंडित रवि शर्मा, पंडित मनोज शर्मा और उनकी टीम द्वारा किया जा रहा है। वे बताते हैं, "रामायण पाठ न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि समाज को नैतिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम भी है। 28 वर्षों में हमने हजारों पाठ पूर्ण किए हैं, और हर बार भक्तों की संख्या बढ़ती गई।"

त्रिमूर्ति चौराहा जो भोपाल, विदिशा-रायसेन मार्ग पर स्थित है, इस मंदिर के कारण एक आध्यात्मिक केंद्र बन गया है। मंदिर में भगवान शिव, शक्ति मां और हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमाएं विराजमान हैं, जो त्रिमूर्ति का प्रतीक हैं। रामायण पाठ के दौरान मंदिर सजाया जाता है, दीप प्रज्वलित होते हैं और भक्त 'जय सियाराम' के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो जाता है। विशेष रूप से रामनवमी, दशहरा और हनुमान जयंती जैसे पर्वों पर पाठ का महत्व और बढ़ जाता है। इन दिनों सप्ताहव्यापी अखंड पाठ आयोजित होते हैं, जिसमें दूर-दराज के भक्त भी शामिल होते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि इस पाठ ने गांव में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। "रामायण की शिक्षाएं हमें मर्यादा, त्याग और भक्ति का पाठ पढ़ाती हैं। इससे परिवारों में शांति और एकता आई है," बताती हैं मेढ़की की वयोवृद्ध निवासी सरला बाई। युवा पीढ़ी भी इसमें रुचि ले रही है। स्थानीय छात्राएं रागिनी शर्मा कहती हैं, "हम स्कूल से लौटकर पाठ सुनने आते हैं। यह हमें तनावमुक्त करता है और रामकथा के माध्यम से जीवन के सबक सिखाता है।"

पिछले 28 वर्षों में कई चमत्कारिक घटनाएं भी जुड़ी हैं। एक भक्त ने बताया कि उनके परिवार की बीमारी के समय पाठ के दौरान चमत्कार हुआ और स्वास्थ्य लाभ मिला। मंदिर के पुजारी पंडित हेमंत भार्गव बिट्टू महाराज ने कहा, "हमारा लक्ष्य इस परंपरा को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। आने वाले समय में डिजिटल माध्यम से भी पाठ प्रसारित करने की योजना है।" ग्राम पंचायत सरपंच संगीता रावत, सरपंच प्रतिनिधि संतोष रावत ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह गांव की सांस्कृतिक धरोहर है और प्रशासन इसका समर्थन करता रहेगा। आज जब दुनिया भागदौड़ भरी हो, मेढ़की पंचायत के त्रिमूर्ति चौराहे का यह रामायण पाठ शांति और आस्था का सच्चा आश्रय बन गया है। 28 वर्षों की यह यात्रा सिद्ध करती है कि सच्ची भक्ति समय की कसौटी पर खरी उतरती है। भक्तों की संख्या में वृद्धि हो रही है, और यह परंपरा आने वाले दशकों तक जारी रहेगी। राम नाम का जाप और रामायण पाठ ग्रामीण जीवन को समृद्ध बनाए रखेगा।

मंदिर परिसर में लगता है दिव्य दरबार--शिव शक्ति हनुमान मंदिर में  दिव्य दरबार लगा रहे पंडित हेमंत भार्गव बिट्टू महाराज द्वारा बताया गया कि यहां पर कई प्रकार की समस्या का समाधान हो जाता हैं। जैसे पुत्र प्राप्ति ओर शराब छोड़ने में सहायता एवं कई दुर्लभ कार्यों की पूर्ति 5 शनिवार की आरती करने से पूरी होती हैं। शनिवार को महाआरती ठीक 7 बजे शाम से प्रारंभ होती हैं।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28