42 गांवों की सेहत भगवान भरोसे, सलामतपुर PHC में महीनों से नही है MBBS डॉक्टर
-डॉक्टर विहीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, ईलाज के लिए 20 से 25 किलोमीटर तक भटक रहे मरीज
-एमबीबीएस डॉक्टर नही होने से आयुष चिकित्सक कर रहे हैं मरीजों का ईलाज
-जानकारी होने के बाद भी जिले के अधिकारी नही कर रहे समस्या का समाधान
-स्थानीय रहवासियों ने दी आंदोलन करने की चेतावनी
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
रायसेन जिले में स्थित सलामतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) कई महीनों से बिना स्थायी डॉक्टर के चल रहा है। इस केंद्र पर निर्भर 42 गांवों के ग्रामीणों को छोटी-बड़ी बीमारियों के लिए भी कस्बे या जिला अस्पताल तक का लंबा सफर तय करना पड़ रहा है।गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले पांच से छह महीनों से यहां नियमित मेडिकल ऑफिसर की तैनाती नहीं हुई है। कभी-कभी राहत के तौर पर कोई डॉक्टर प्रभारी बनकर आता है, लेकिन स्थायी व्यवस्था न होने से स्वास्थ्य सेवाएं ठप पड़ी हुई हैं। यहां की स्वास्थ्य सेवाएं आयुष डॉक्टर के हवाले कर रखी हैं। सलामतपुर पीएचसी सांची सिविल अस्पताल के अंतर्गत आता है। और यह क्षेत्र सांची स्तूप जैसे पर्यटन स्थलों के निकट होने के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाओं की दृष्टि से उपेक्षित सा लगता है।
ग्रामीणों की व्यथा--ग्राम पंचायत रातातलाई सरपंच रघुवीर सिंह मीणा, सलामतपुर के निवासी कैलाश गोस्वामी, राकेश मीणा, हमज़ा जाफ़री ने बताया, “यहां बुखार, दस्त, सांस की तकलीफ या चोट-फ्रैक्चर जैसी सामान्य समस्याओं के लिए भी हमें 20-25 किलोमीटर दूर रायसेन या 8 किलोमीटर दूर सांची जाना पड़ता है। एंबुलेंस भी यहां पर कभी उपलब्ध नहीं रहती। कई बार प्राइवेट क्लिनिकों में महंगे इलाज के लिए जाना पड़ता है, जो गरीब परिवारों की कमर तोड़ देता है।” एक गर्भवती महिला ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले महीने उनकी डिलीवरी के समय कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था। उन्हें रायसेन जिला चिकित्सालय रेफर करना पड़ा। “सरकारी अस्पताल में डॉक्टर न होने से हमारी जान जोखिम में पड़ जाती है।
42 गांवों की 35 से 40 हज़ार आबादी निर्भर है सलामतपुर पीएचसी पर--स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस पीएचसी पर करीब 42 गांवों की लगभग 35-40 हजार आबादी निर्भर है। इनमें अधिकांश ग्रामीण कृषि पर निर्भर हैं और आर्थिक रूप से कमजोर हैं। दवाइयों का स्टॉक भी समय-समय पर खत्म हो जाता है क्योंकि डॉक्टर न होने से प्रबंधन प्रभावित होता है। वहीं अस्पताल मुख्य भोपाल विदिशा हाइवे पर होने के कारण भी यहां पर अधिक संख्या में मरीज़ों का आना जाना लगा रहता है।
स्वास्थ्य विभाग का पक्ष--जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि सलामतपुर पीएचसी में मेडिकल ऑफिसर की पोस्ट खाली पड़ी है। रायसेन के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सीएमएचओ दिनेश खत्री ने बताया कि कई जगहों पर ट्रांसफर और प्रमोशन के कारण पद रिक्त हो गए हैं। हमने उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी है और जल्द ही सलामतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एमबीबीएस डॉक्टर की नई तैनाती की जाएगी।” हालांकि, ग्रामीण इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से ऐसी समस्याएं बार-बार उठती रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला। पूर्व में भी इसी केंद्र में डॉक्टर न होने की शिकायतें सामने आई थीं।
व्यापक प्रभाव और चुनौतियां---डॉक्टरों की कमी के कारण न केवल ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि टीकाकरण, परिवार नियोजन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम और संचारी रोगों की रोकथाम भी बाधित हो रही है। मानसून के मौसम में डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन यहां तत्काल चिकित्सा सुविधा न होने से छोटी समस्या भी गंभीर रूप ले लेती है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को उठाया है। सांची जनपद पंचायत के एक सदस्य ने कहा, “हमने कई बार लिखित शिकायत की है। स्वास्थ्य मंत्री और जिला कलेक्टर को अवगत कराया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि कम से कम दो एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती तुरंत की जाए और केंद्र को 24x7 सुविधा युक्त बनाया जाए।”
सरकारी योजनाओं पर सवाल--मध्य प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत, PM-JAY और मातृ वंदन योजना के तहत इस केंद्र को मजबूत करने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग है। ग्रामीण पूछते हैं कि जब जिला स्तर पर मेडिकल कॉलेज खोलने की बात हो रही है, तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्तर पर डॉक्टर क्यों नहीं मिल पा रहे?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी एक पुरानी समस्या है। बेहतर इंसेंटिव, आवास सुविधा और करियर ग्रोथ के अवसर न होने से युवा डॉक्टर शहरों की ओर रुख करते हैं।
मांग और अपील--ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्वास्थ्य मंत्री से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की है। वे चाहते हैं कि सलामतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी डॉक्टर के साथ-साथ लैब टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स और जरूरी दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।यह समस्या केवल सलामतपुर की नहीं है, बल्कि पूरे रायसेन जिले और मध्य प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों की सच्चाई को दर्शाती है। स्वास्थ्य सेवा जनता का मौलिक अधिकार है। अगर बुनियादी स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तो दूर-दराज के गांवों के लोगों का भरोसा सरकारी व्यवस्था पर कैसे टिकेगा?

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