बरेली में तनाव: मौलाना तौकीर रजा हाउस अरेस्ट, पुलिस से तीखी झड़प के बाद सड़कों पर सन्नाटा
इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा को रविवार को बरेली में उस वक्त उनके आवास पर ही नजरबंद कर दिया गया, जब वह मुस्लिम समाज पर कथित अत्याचारों के खिलाफ गिरफ्तारी देने के लिए कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालने की तैयारी में थे। इस दौरान मौलाना के समर्थकों और पुलिस बल के बीच तीखी झड़प देखने को मिली, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
सुबह से ही मौलाना तौकीर रजा के आवास के बाहर बड़ी संख्या में उनके समर्थक जुटना शुरू हो गए थे। मौलाना ने घोषणा की थी कि वह अल्पसंख्यक समुदाय पर हो रहे "जुल्म" के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए अपनी गिरफ्तारी देंगे। हालांकि, पुलिस ने किसी भी तरह की भीड़ को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त इंतजाम किए थे। जैसे ही मौलाना ने घर से बाहर निकलने की कोशिश की, पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस दौरान पुलिस और मौलाना के समर्थकों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। समर्थक बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश कर रहे थे, जबकि पुलिस उन्हें नियंत्रित करने का प्रयास कर रही थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, मौलाना तौकीर रजा के आवास और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान तैनात कर दिए गए। पूरे शहर में निषेधाज्ञा (धारा 144) लागू कर दी गई है, जिसके तहत चार से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है।
नजरबंद किए जाने के बाद मौलाना तौकीर रजा ने मीडिया से बात करते हुए देश के मौजूदा हालात पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "ये देश में कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।" मौलाना ने बजरंग दल जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की भी पुरजोर मांग की। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी की तैयारी को "देश में नई क्रांति लाने की पहल" बताया, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए लड़ना है।
पुलिस की कड़ी चौकसी के बावजूद, मौलाना तौकीर के कुछ वफादार समर्थक और आईएमसी के नेता सेठ दामोदर पार्क के बाहर धरने पर बैठ गए। वे मौलाना की रिहाई और उनकी मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे थे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए कोई बल प्रयोग नहीं किया, लेकिन स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
बरेली में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, और प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरी तरह से सतर्क है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक मुद्दों को लेकर पहले से ही तनाव का माहौल बना हुआ है।






























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