विपक्ष के प्रदर्शन के बीच पुलिस की कार्रवाई, राहुल-अखिलेश हिरासत में
नई दिल्ली। देश की राजधानी में छात्रों की समस्याओं और नीट परीक्षा विवाद को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी के नेताओं और प्रमुख विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री निवास के बाहर उग्र प्रदर्शन किया। विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने और गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई सांसदों और वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया। कांग्रेस ने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार को छात्रों के उत्पीड़न का जिम्मेदार ठहराया है।
प्रियंका गांधी का सरकार पर हमला और हिरासत
प्रदर्शन के दौरान वायनाड से नवनिर्वाचित सांसद प्रियंका गांधी को भी दिल्ली पुलिस ने अपनी कस्टडी में लिया। हिरासत में लिए जाने के समय प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार पूरी तरह से डरी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विपक्ष सरकार की इस तरह की दबाव बनाने वाली नीतियों से डरने वाला नहीं है, बल्कि सच्चाई यह है कि सरकार खुद विपक्ष की एकजुटता और छात्रों की आवाज से घबरा रही है।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव बस में बैठाए गए
प्रदर्शन स्थल पर स्थिति तब और अधिक संवेदनशील हो गई जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी कांग्रेस नेताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर धरने पर बैठ गए। दिल्ली पुलिस ने स्थिति को बिगड़ते देख लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अखिलेश यादव दोनों को धरनास्थल से हटाकर हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने दोनों प्रमुख विपक्षी नेताओं को धरनास्थल से उठाकर बस में बिठाया और सुरक्षित स्थान पर ले गई।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का राहुल गांधी पर पलटवार
इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सरकार का पक्ष रखते हुए एक्स पर एक बयान जारी किया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के समर्थकों के साथ अचानक अकबर रोड के पास धरने पर बैठने की सूचना मिलते ही सरकार ने गृह सचिव गोविंद मोहन और उन्हें वार्ता के लिए भेजा था। जितेंद्र सिंह के अनुसार, जब राहुल गांधी से धरना समाप्त करने का अनुरोध किया गया तो उन्होंने संसद में नीट मुद्दे पर चर्चा की शर्त रखी। शीर्ष नेतृत्व से अनुमति मिलने के बाद जब सरकार ने चर्चा का आश्वासन दिया, तब राहुल गांधी अपनी बात से पलट गए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की नई मांग जोड़ दी। केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी के इस रवैये को लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस की नीयत पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस मुद्दे पर कांग्रेस और केंद्र सरकार दोनों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य के लिए सोनम वांगचुक बीते कई दिनों से अनशन पर हैं और जंतर-मंतर पर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस युवाओं के इस वास्तविक आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि बीजेपी और कांग्रेस की आपसी सहमति के तहत ही यह पूरा ड्रामा रचा जा रहा है ताकि जंतर-मंतर पर चल रहे मुख्य आंदोलन से जनता का ध्यान भटकाया जा सके।






























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