केमखेड़ी घोड़ा चौक मार्ग बंद किए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश, रेल्वे विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन की चेतावनी
-रेल्वे की बाउंड्रीवाल से बड़ी चिंता, खेती शिक्षा और आवागमन पर मंडराया संकट
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
सांची विकासखंड के ग्राम अंबाडी से केमखेड़ी घोड़ा चौक जाने वाले मार्ग को रेलवे विभाग द्वारा पूरी तरह बंद किए जाने की कार्रवाई से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों के अनुसार कुछ वर्ष पूर्व रेलवे विभाग ने इस मार्ग पर स्थित रेलवे फाटक को बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अंडरपास पुलिया का निर्माण कराया था। लेकिन बरसात के दिनों में अंडरपास में पानी भर जाने से आवागमन बाधित हो जाता था। इसके बावजूद ग्रामीण किसी तरह इसी मार्ग का उपयोग करते रहे। यह रास्ता लगभग 8 से 10 गांवों के लोगों की आवाजाही का प्रमुख साधन है तथा अनेक किसानों की कृषि भूमि रेलवे लाइन के दूसरी ओर स्थित है। अब रेलवे विभाग द्वारा उक्त स्थान पर बाउंड्री वॉल का निर्माण कर अंडरपास क्षेत्र को भी बंद किया जा रहा है। इससे किसानों के सामने खेती-किसानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण पन्नालाल पटेल केमखेड़ी और महेंद्र पटेल अम्बाडी का कहना है कि धान की बोवनी का समय निकट है, ऐसे में ट्रैक्टर, कृषि यंत्र और अन्य संसाधन खेतों तक कैसे पहुंचेंगे, यह बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने बताया कि यह मार्ग प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क को भी जोड़ता है। यदि रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया जाता है तो करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए और निर्माण कार्य रुकवाने का प्रयास किया, लेकिन ठेकेदार के कर्मचारियों ने काम जारी रखा। वहीं इस मार्ग से स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि सरकार एक ओर "बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ" और "स्कूल चले हम" जैसे अभियान चलाती है, जबकि दूसरी ओर स्कूल पहुंचने का रास्ता ही बंद किया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और रेलवे विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर वैकल्पिक एवं स्थायी समाधान उपलब्ध कराने की मांग की है।
8 से 10 गांवों के हज़ारों ग्रामीणों का रास्ता हो जाएगा बंद--सांची जनपद की ग्राम पंचायत अंबाडी के गांव केमखेड़ी और घोड़ा चोक
जाने वाले मार्ग को रेलवे विभाग द्वारा पूरी तरह बंद किए जाने की कार्रवाई से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। अभी तो 8 से 10 गांवों के हज़ारों ग्रामीण जैसे तैसे अंदर पुलिया में से निकलकर इस और से दूसरी और निकल जाते थे। लेकिन अब रेलवे विभाग उक्त स्थान पर बाउंड्रीवाल का निर्माण कर रहा है। जिससे गांवों के स्कूली बच्चों सहित किसानों का रास्ता ही बंद हो जाएगा। और मरीजों को भी इसी मुसीबत से दो चार होना पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि कई साल से पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, सांची विधायक सहित रेलवे डीआरएम को भी इस समस्या से लिखित में शिकायत दे चुके हैं। कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि पहले यहां पर रेलवे गेट हुआ करता था। वहां से आसानी से निकल जाते थे। और खेती किसानी करने वाले ट्रैक्टर इस पार से उस पार चले जाते थे। अब आलम यह है कि रेलवे ने बरसों पुराने गेट को बंद कर दिया है। जिससे खेती किसानी करने वाले किसानों सहित स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हैं। बारिश के समय पर खाद बीज ले जाने के लिए ट्रैक्टर पटरी के उस पार नहीं जा पाता है। जिससे मजदूरों द्वारा खाद बीज कंधे पर रखकर भेजा जाता है। जिससे खाद बीज से ज्यादा पैसा मजदूरों को देना पड़ता है। रेलवे की अंडर पुलिया में बरसात में 4 महीने तक पानी भरा रहता है। और इसके अलावा कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं है। अब रेलवे अंडर पुलिया भी बंद हो जाएगी तो हजारों लोगों के सामने आवागमन की दिक्कत हो जाएगी।
इनका कहना है।
काफी समय पहले रेल्वे विभाग द्वारा फाटक बंद कर दिया गया था। अभी अंडर पुलिया से 8 से 10 गांवों के ग्रामीण आवागमन करते हैं। अब रेलवे द्वारा उक्त स्थान पर बाउंड्री वॉल का निर्माण कर अंडरपास क्षेत्र को भी बंद किया जा रहा है। इससे किसानों के सामने खेती-किसानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हमारी समस्या का समाधान नही हुआ तो हम चक्काजाम करेंगे और ट्रेनों को भी रोककर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
रमेश कुमार, सरपंच प्रतिनिधि अंबाडी।
गांव से काफी संख्या में छात्र छात्राएं स्कूल पड़ने जाती है। अभी तो अंडर पुलिया से निकल जाते हैं। लेकिन अब यह रास्ता भी बंद किया जा रहा है। सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का अभियान चलाती है। लेकिन ऐसी स्तिथी में बेटियां कैसे पड़ेंगी।
मानसी लोधी, छात्रा केमखेड़ी।

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