झिंगुरों के आतंक से सलामतपुर के ग्रामीण परेशान, रात होते ही बढ़ जाता है इनका प्रकोप
- ग्रामीणों का भोजन करना भी हुआ दुश्वार, प्रशासन से समाधान की गुहार
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
क्षेत्र के सलामतपुर, बेरखेड़ी चौराहा, त्रिमूर्ति चौराहा, अम्बाडी, कुल्हाड़िया, गीदगढ़, सेमरा, खोहा गाँव और आसपास के इलाकों में इन दिनों ग्रामीण एक अजीबोगरीब और बेहद परेशान करने वाली समस्या से जूझ रहे हैं। गाँव में झिंगुरों (Crickets) का इस कदर आतंक बढ़ गया है कि ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है। दिन ढलते ही और रात होते ही इन झिंगुरों का प्रकोप इस कदर बढ़ जाता है कि लोगों को अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां पूरी तरह बंद करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा स्थिति तब खराब हो जाती है, जब ग्रामीण रात के समय भोजन करने बैठते हैं।
भोजन की थाली तक में घुस रहे झिंगुर--स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही रात के समय घरों में लाइटें जलती हैं, हजारों की संख्या में झिंगुर रोशनी की तरफ आकर्षित होकर घरों के भीतर घुस आते हैं। स्थिति यह हो चुकी है कि लोगों का शांति से भोजन करना भी दुश्वार हो गया है। खाना बनाते समय और खाते समय ये झिंगुर सीधे बर्तनों और भोजन की थाली में आ गिरते हैं। इस वजह से कई बार ग्रामीणों को भूखे पेट ही सोना पड़ता है या फिर अंधेरे में बैठकर खाना खाने की नौबत आ रही है।
बच्चों की पढ़ाई और नींद प्रभावित--झिंगुरों की लगातार होने वाली तेज 'झिं-झिं' की आवाज के कारण रात के समय लोगों का सोना मुश्किल हो गया है। विशेषकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। वहीं, पढ़ाई करने वाले छात्रों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि लाइट जलाते ही पूरी मेज और किताबें झिंगुरों से ढक जाती हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से की फॉगिंग की मांग--गाँव के बुजुर्गों का कहना है कि मौसम में अचानक आए बदलाव और उमस के कारण इस बार झिंगुरों की तादाद अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से गाँव में तुरंत कीटनाशक दवाओं का छिड़काव (फॉगिंग) कराने की मांग की है, ताकि इस मुसीबत से राहत मिल सके। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो ग्रामीणों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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