दीवानगंज स्टेशन पर दर्दनाक हादसा: ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात महिला की मौत, 3 घंटे तक पटरी पर पड़ा रहा शव
-प्रशासनिक लेटलतीफी से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश, जीआरपी की स्थायी चौकी की मांग तेज
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
सलामतपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दीवानगंज रेलवे स्टेशन पर शनिवार को एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला हादसा सामने आया। यहाँ रेलवे ट्रैक पार करते समय एक अज्ञात महिला तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आ गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि महिला ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद करीब तीन घंटे तक मृतका का शव पटरी पर ही पड़ा रहा, जिसे लेकर स्थानीय निवासियों और यात्रियों में रेलवे प्रशासन तथा जीआरपी के खिलाफ गहरा आक्रोश देखा गया।
कैसे हुआ हादसा--प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मृतका की उम्र लगभग 35 से 40 वर्ष के बीच है। वह दीवानगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो के पास से पटरी पार करने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान अचानक आई एक तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में वह आ गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना स्टेशन मास्टर और सलामतपुर पुलिस को दी। सूचना मिलते ही दीवानगंज पुलिस चौकी के जवान मौके पर पहुंच गए, लेकिन चूंकि मामला रेलवे सीमा क्षेत्र का था, इसलिए कानूनी रूप से शव को उठाने और पंचनामा बनाने का अधिकार केवल जीआरपी के पास था।
तीन घंटे तक तमाशबीन बना रहा सिस्टम--हादसे के बाद संवेदनहीनता का एक बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब महिला का शव तीन घंटे तक तेज धूप और धूल के बीच पटरियों पर ही पड़ा रहा। सलामतपुर और दीवानगंज रेलवे स्टेशनों पर जीआरपी की कोई स्थायी व्यवस्था या चौकी नहीं है। इस वजह से किसी भी हादसे की स्थिति में पुलिस बल को भोपाल से बुलाना पड़ता है।
शिनाख्त के प्रयास तेज-- जांच में जुटी जीआरपी
काफी इंतजार के बाद भोपाल और विदिशा से पहुंची जीआरपी की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और शव को अपने कब्जे में लेकर मर्ग कायम किया। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि महिला का चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके कारण शुरुआती जांच में उसकी पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया है और आस-पास के गांवों में महिला की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। इस घटना के बाद एक बार फिर क्षेत्रवासियों ने रेल मंत्रालय और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन स्थितियों को देखते हुए सलामतपुर या दीवानगंज स्टेशन पर जीआरपी की एक स्थायी पुलिस चौकी तुरंत स्थापित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी संवेदनहीनता दोबारा न देखनी पड़े।
इनका कहना है।
यह कोई पहली घटना नहीं है। जब भी यहाँ कोई दुर्घटना होती है, तो भोपाल या विदिशा से जीआरपी टीम के आने का इंतजार करना पड़ता है। तीन-तीन घंटे तक शवों का इस तरह पटरियों पर पड़े रहना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
नसीम अली, स्थानीय रहवासी।






























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