सांची जनपद के स्कूलों में ‘वॉश बेसिन घोटाला’ बच्चों को पानी नहीं, भ्रष्टाचार की कहानी मिल रही विरासत में
-स्कूलों में कहीं टोटियां गायब तो कहीं पानी का नामोनिशान नहीं, 2 दिन बाद खुलना है स्कूल, बच्चों को होगी परेशानी
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
रायसेन जिले के सांची विकासखंड के शासकीय स्कूलों में जल जीवन मिशन के तहत लगभग तीन वर्ष पहले लगाए गए वॉश बेसिन एवं प्याऊ अब सुविधाओं के बजाय भ्रष्टाचार की मिसाल बनकर खड़े हैं। लाखों रुपए खर्च कर बनाई गई ये व्यवस्थाएं आज कई स्कूलों में सफेद हाथी साबित हो रही हैं। कहीं टोटियां गायब हैं, कहीं पानी का नामोनिशान नहीं है, तो कहीं पूरा ढांचा जर्जर होकर टूटने की कगार पर पहुंच गया है।हैरानी की बात यह है कि जिन वॉश बेसिन और पियाऊ का उद्देश्य बच्चों को स्वच्छ पेयजल और हाथ धोने की सुविधा उपलब्ध कराना था, वे कई स्थानों पर शुरू ही नहीं हो पाए। सवाल यह उठता है कि जब न पानी की व्यवस्था हुई, न टोटियां लगीं और न ही सुविधाएं चालू हुईं, तो आखिर निर्माण कार्य पूर्ण मानकर भुगतान कैसे कर दिया गया? सांची विकासखंड के मुड़ियाखेड़ा शासकीय स्कूल में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक दिखाई दे रही है। यहां बना वॉश बेसिन और प्याऊ आज तक उपयोग में नहीं आ सका। टोटियां गायब हैं, टाइल्स टूटकर गिर चुकी हैं और पूरा ढांचा घटिया निर्माण की कहानी बयां कर रहा है। देखने से ऐसा प्रतीत होता है मानो वर्षों से इसकी कोई देखरेख ही नहीं की गई हो।
2 दिन बाद खुलना है स्कूल, बच्चों को हाथ धोने के लिए नही मिलेगें वॉश बेसिन--ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया और जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना जांच-पड़ताल के भुगतान कर दिया।व्यंग्य में लोग कहते नजर आ रहे हैं कि 16 जून 2 दिन बाद स्कूल खुलना है"बच्चों को हाथ धोने के लिए वॉश बेसिन नहीं मिलेंगे, लेकिन भ्रष्टाचारियों ने अपने हाथ जरूर अच्छी तरह धो लिए।" वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यदि यही गुणवत्ता रही तो आने वाले समय में स्कूलों में सुविधाएं नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के स्मारक खड़े दिखाई देंगे। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच किसने की? भुगतान किस आधार पर हुआ? और करोड़ों रुपये की योजनाओं का लाभ बच्चों तक क्यों नहीं पहुंच पाया? मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है। यदि समय रहते जिम्मेदारों की जवाबदेही तय नहीं की गई तो जनहित की योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी।
सरकारी स्कूलों में बदहाल पड़े वॉश बेसिन और प्याऊ, पानी को तरस रहे बच्चे--रायसेन जिले सहित सांची जनपद के शासकीय स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए बनाए गए वॉश बेसिन और प्याऊ देखरेख के अभाव में बदहाली के आंसू रो रहे हैं। क्षेत्र के कई स्कूलों में नल टूटे पड़े हैं, तो कहीं वाटर कनेक्टिविटी न होने के कारण पानी की सप्लाई ही पूरी तरह बंद है। 2 दिन बाद स्कूल खुलने पर छात्र-छात्राओं को पीने के साफ पानी के लिए यहां-वहां भटकना पड़ेगा।"स्वच्छता अभियान" के दावों को मुंह चिढ़ाती ये तस्वीरें व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़ी करती हैं। स्कूलों में बने वॉश बेसिन गंदगी से पटे पड़े हैं, जिससे मध्यान्ह भोजन के बाद बच्चों को हाथ धोने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। मजबूरन बच्चों को या तो घर से पानी की बोतलें लानी पड़ेगी या फिर वे स्कूल के बाहर असुरक्षित स्रोतों से पानी पीने को मजबूर होना पड़ेगा। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूलों की इस दुर्दशा का संज्ञान लेकर जल्द से जल्द मरम्मत कार्य कराया जाए, ताकि नौनिहालों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ न हो।
इनका कहना है।
सांची विकासखंड के मुड़ियाखेड़ा शासकीय स्कूल में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक दिखाई दे रही है। यहां पर बना वॉश बेसिन और प्याऊ आज तक उपयोग में नहीं आ सका। टोटियां गायब हैं, टाइल्स टूटकर गिर चुकी हैं और पूरा ढांचा घटिया निर्माण की कहानी बयां कर रहा है। नया सत्र शुरू होने वाला है। बच्चे परेशान होंगे। ऐसे निर्माण की जांच होना चाहिए और ज़िम्मेदारों पर कार्रवाई होना चाहिए।
शफीक खान, उपसरपंच मुड़ियाखेड़ा।
रायसेन जिले सहित सांची जनपद के स्कूलों में बनाए गए वॉश बेसिन ओर प्याऊ की स्तिथि यह है कि स्कूलों में बने वॉश बेसिन गंदगी से पटे पड़े हैं, जिससे मध्यान्ह भोजन के बाद बच्चों को हाथ धोने में भारी परेशानी होगी और बच्चों को घर से पानी लाना पड़ सकता है।
रघुवीर सिंह मीणा, सरपंच ग्रा.पं. रातातलाई।

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