अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर दीवानगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। लगभग 42 गांवों की आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है, लेकिन यहां केवल एक ही मेडिकल ऑफिसर पदस्थ हैं। हालात ऐसे हैं कि जब मरीज अस्पताल पहुंचते हैं तो अक्सर डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं मिलते और उन्हें बिना इलाज के वापस लौटना पड़ता है।

दीवानगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल ऑफिसर डॉ. पलक पटेरिया पदस्थ हैं, लेकिन उनकी ड्यूटी सप्ताह में दो से तीन दिन सांची में लगा दी जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब एक अस्पताल में पहले से ही केवल एक डॉक्टर है, तो उसे दूसरे स्थान पर भेजकर यहां के मरीजों की जिम्मेदारी आखिर किसके भरोसे छोड़ी जा रही है?

अस्पताल में नही है पोस्टमार्टम की व्यवस्था--स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब किसी मृतक का पोस्टमार्टम कराया जाना होता है। दीवानगंज में पोस्टमार्टम की कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए पोस्टमार्टम के लिए रायसेन जिला अस्पताल जाना पड़ता है। इस दौरान डॉ. पटेरिया को भी रायसेन जाना पड़ता है, जिससे अस्पताल में आने वाले मरीज घंटों इंतजार करने के बाद मायूस होकर लौट जाते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मजबूरी में लोगों को झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे मरीजों की जान तक जोखिम में पड़ सकती है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब 42 गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था एक ही डॉक्टर के भरोसे है, तो सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं धरातल पर आखिर कैसे सफल होंगी?

रहवासियों ने की 2 स्थाई डॉक्टरों की मांग--ग्रामीणों ने मांग की है कि दीवानगंज अस्पताल में कम से कम दो स्थायी डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति की जाए और पोस्टमार्टम जैसी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।व्यंग्य यह है कि स्वास्थ्य विभाग शायद यह मान बैठा है कि एक डॉक्टर में तीन डॉक्टरों की शक्ति होती है। तभी तो एक ही चिकित्सक से दीवानगंज का इलाज, सांची की ड्यूटी और रायसेन का पोस्टमार्टम सब कुछ कराया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि इस व्यवस्था की कीमत आखिर मरीज कब तक चुकाते रहेंगे? अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर ध्यान देते हैं या फिर दीवानगंज के मरीज यूं ही अस्पताल में डॉक्टर का इंतजार करते रहेंगे।

इनका कहना है।

आपके द्वारा यह मामला मेरे संज्ञान में लाया गया है। में सीएमएचओ से बात कर के इसका जो भी समाधान होगा वो किया जाएगा।

मनोज उपाध्याय, अपर कलेक्टर रायसेन।

42 से 45 गांवों के मरीज यहां ईलाज कराने आते हैं। लेकिन अस्पताल में मौजूद डॉक्टर की ड्यूटी कभी रायसेन पोस्टमार्टम में लगा देते हैं कभी सांची सिविल अस्पताल में ड्यूटी लगा देते हैं। जिसकी वजह से ईलाज कराने आए मरीज परेशान होते हैं। इस समस्या का समाधान शीघ्र ही होना चाहिए।

इकबाल खान, स्थानीय रहवासी।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28