प्रचार-प्रसार के अभाव में 'युवा संगम' फेल: जिला स्तरीय रोजगार मेले में खाली पड़ी रहीं कुर्सियां
-सलामतपुर के शासकीय स्कूल में आयोजित किया गया था रोजगार मेला
-7 कंपनियों के प्रतिनिधि आए थे मेले में, सिर्फ 40 युवाओं के ही हुए पंजीयन
-जिला रोजगार अधिकारी बोले कि गर्मी की वजह से कम युवा आए मेले में।
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के सरकार और प्रशासन के दावे धरातल पर कितने खोखले साबित हो रहे हैं, इसकी बानगी मंगलवार को सलामतपुर में देखने को मिली। यहाँ आयोजित जिला स्तरीय 'युवा संगम' रोजगार मेला पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ। मेले में युवाओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद थी, लेकिन हकीकत यह रही कि पंडाल में लगाई गईं कुर्सियां दिनभर खाली पड़ी रहीं। जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही और कार्यक्रम के नाममात्र के प्रचार-प्रसार के कारण यह महत्वपूर्ण आयोजन पूरी तरह से विफल हो गया।
शासकीय स्कूल में हुआ था आयोजन, छाई रही वीरानी--
यह जिला स्तरीय रोजगार मेला सलामतपुर के स्थानीय शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में आयोजित किया गया था। आयोजन का मुख्य उद्देश्य जिले भर के शिक्षित और कुशल बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र की नामी कंपनियों में नौकरी दिलाना था। प्रशासन ने इसके लिए टेंट, कुर्सियां और मंच की व्यापक व्यवस्था की थी, लेकिन पूरी तैयारी धरी की धरी रह गई। सुबह से लेकर दोपहर बीत जाने तक मेला परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। गिने-चुने युवाओं के अलावा वहाँ सिर्फ आयोजन से जुड़े कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी ही नजर आ रहे थे। खाली पड़ी कुर्सियां चीख-चीख कर आयोजन के कुप्रबंधन की कहानी बयां कर रही थीं।
कंपनियाँ तैयार थीं, पर नहीं मिले युवा--युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से इस मेले में करीब 7 प्रतिष्ठित कंपनियों के प्रतिनिधि और एचआर टीम विशेष रूप से पहुंचे थे। कंपनियाँ अपने साथ विभिन्न पदों के लिए सैकड़ों नियुक्तियों के ऑफर लेकर आई थीं। प्रतिनिधियों को उम्मीद थी कि जिला स्तरीय मेला होने के कारण बड़ी संख्या में प्रतिभावान युवा यहाँ साक्षात्कार के लिए आएंगे। लेकिन जब वे आयोजन स्थल पर पहुंचे, तो वहां का सन्नाटा देखकर दंग रह गए। पूरे दिन के अथक प्रयास और इंतजार के बाद, मेले में सिर्फ और सिर्फ 40 युवाओं ने ही अपना पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) कराया। इतनी कम संख्या में पंजीयन होने से कंपनियों के प्रतिनिधि भी खासे निराश दिखे और समय से पहले ही बोरिया-बिस्तर समेटने को मजबूर हो गए।
प्रचार-प्रसार के नाम पर दिखाई दी सिर्फ औपचारिकता--
स्थानीय नागरिकों और युवाओं का साफ तौर पर कहना है कि इस रोजगार मेले के बारे में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों या कस्बों में कोई जानकारी ही नहीं दी गई थी। न तो गाँवों में मुनादी कराई गई, न ही प्रमुख चौराहों पर बैनर-पोस्टर लगाए गए। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों का भी सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया गया। युवाओं का आरोप है कि विभाग ने केवल कागजी खानापूर्ति और बजट ठिकाने लगाने के लिए गुपचुप तरीके से इस मेले का आयोजन कर लिया, ताकि फाइलों में इसे सफल दिखाया जा सके। यदि समय रहते सही तरीके से प्रचार-प्रसार किया जाता, तो आज हजारों की संख्या में बेरोजगार युवा इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाने यहाँ जरूर पहुंचते।
जिम्मेदारों का अजीब तर्क: 'गर्मी की वजह से नहीं आए युवा'
जब इस पूरी अव्यवस्था और मेले के फेल होने को लेकर रायसेन और विदिशा जिला रोजगार अधिकारी एबी खान से बात की गई, तो उन्होंने अपनी नाकामी छुपाने के लिए एक अजीब और गैर-जिम्मेदाराना तर्क दे दिया। जिला रोजगार अधिकारी ने कहा कि, "मेले की तैयारियां पूरी थीं, लेकिन इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है, जिसके कारण युवा अपने घरों से बाहर नहीं निकले और मेले में उम्मीद से बेहद कम संख्या में आए।"
अधिकारी के इस बयान के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या युवाओं को रोजगार की जरूरत मौसम देखकर होती है? सच तो यह है कि प्रशासन अपनी लापरवाही का ठीकरा अब मौसम के सिर फोड़कर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है। बहरहाल, इस कुप्रबंधन के कारण जहाँ सरकार की छवि धूमिल हुई है, वहीं क्षेत्र के उन सैकड़ों युवाओं का नुकसान हुआ है जो रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं।

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