-एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने जाना पड़ता है 8 किलोमीटर दूर सांची सिविल अस्पताल

अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

आसपास के ग्रामीण और शहरी इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है।सलामतपुर सहित समूचे क्षेत्र में आवारा कुत्तों के बढ़ते खौफ से स्थानीय नागरिक बेहद परेशान हैं। आए दिन मासूम बच्चों, राहगीरों और बुजुर्गों पर आवारा कुत्तों के झुंड द्वारा हमला करने की खबरें सामने आ रही हैं। पूर्व में भी श्वान काटने (डॉग बाइट) के कई गंभीर मामले आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर सोया हुआ है। ​क्षेत्र में दहशत का माहौल इस कदर है कि लोगों का सुबह-शाम सड़कों पर अकेले निकलना दूभर हो गया है। विशेषकर स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए ये आवारा कुत्ते बड़ी मुसीबत बन चुके हैं।

​स्वास्थ्य केंद्र की बड़ी लापरवाही,नहीं मिलते एंटी रैबीज इंजेक्शन--​एक तरफ जहां आवारा कुत्तों का आतंक चरम पर है, वहीं दूसरी ओर सलामतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पीएचसी की बदहाली ने पीड़ितों की मुसीबतों को दोगुना कर दिया है। नियमानुसार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी रैबीज इंजेक्शन एआरएस की उपलब्धता अनिवार्य होनी चाहिए। लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल उलट है।​सलामतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध ही नहीं रहते हैं। जब भी कोई पीड़ित इलाज या इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुंचता है, तो उसे साफ मना कर दिया जाता है। ऐसा बताया जा रहा है कि अब एंटी रैबीज इंजेक्शन की एक शीशी में 4 से 5 डोज़ रहते हैं। अगर जैसे कोई एक ही पीड़ित व्यक्ति को डोज़ लगाया जाता है तो कुछ ही घंटे में शीशी खुलने के बाद खराब हो जाती है। जबकि पहले जो शीशी आती थी उसमें 1 डोज़ ही रहता था। इसी समस्या की वजह से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रैबीज इंजेक्शन भेजना बंद कर दिए हैं।

8 किलोमीटर दूर सांची दौड़ने को मजबूर हैं पीड़ित--सलामतपुर स्वास्थ्य केंद्र की इस घोर लापरवाही का खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में पीड़ित को 8 किलोमीटर दूर सांची सिविल अस्पताल या 18 किलोमीटर दूर रायसेन रेफर कर दिया जाता है।अचानक श्वान के काटने से घबराए मरीज और उनके परिजनों को तुरंत सांची भागना पड़ता है। जिनके पास खुद का वाहन नहीं है, उन्हें ऑटो या अन्य साधनों के लिए भारी-भरकम किराया चुकाना पड़ता है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, कुत्ता काटने के बाद जितनी जल्दी हो सके एंटी रैबीज का पहला डोज लग जाना चाहिए। लेकिन सलामतपुर से सांची की इस दौड़भाग में कई बार घंटों का समय बर्बाद हो जाता है, जो मरीज की जान के लिए बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता है।

जनता में भारी आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी--इस दोहरी मार से क्षेत्र की जनता में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश पनप रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एक तरफ तो नगर परिषद और ग्राम पंचायत आवारा कुत्तों की नसबंदी या उन्हें पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग मूलभूत दवाएं भी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।

​स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सलामतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी रैबीज इंजेक्शनों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई और क्षेत्र को आवारा कुत्तों के आतंक से मुक्ति नहीं दिलाई गई, तो वे चक्काजाम और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ​अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर और जीवन-मरण से जुड़ी समस्या का संज्ञान कब लेते हैं, या फिर किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा है।

इनका कहना है।

पीड़ितों का दर्द:

"अस्पताल में बताया जा रहा है कि अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी रैबीज इंजेक्शन नही आते हैं। क्योंकि यहां पर कुत्तों के काटने के मामले कम संख्या में आते हैं। इसलिए पीड़ित को परेशान होकर सांची सिविल अस्पताल या रायसेन ज़िला चिकित्सालय जाना पड़ता है।

कैलाश गोस्वामी, स्थानीय रहवासी।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28