200 साल प्राचीन बालाजी धाम से मिली मेहगांव को नई पहचान, हफ्ते में दो दिन सजता है 'दिव्य दरबार'
-श्रद्धा और चमत्कार का केंद्र बना रायसेन का यह पावन धाम, 24 वर्षों से अनवरत जारी है अखंड जोत और रामायण पाठ
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
कहते हैं जहाँ अटूट श्रद्धा होती है, वहाँ साक्षात ईश्वर का वास होता है। कुछ ऐसा ही नजारा रायसेन जिला मुख्यालय के समीप स्थित ग्राम पंचायत मेहगांव में देखने को मिलता है। इस छोटे से गांव को आज पूरे मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में एक अलग और विशिष्ट पहचान मिली है, और इसका श्रेय जाता है यहाँ स्थित 200 वर्ष पुराने प्राचीन बालाजी धाम को। यह पावन धाम आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहाँ आने वाले भक्तों की हर बिगड़ी बात बन जाती है।
हफ्ते में दो दिन उमड़ता है जनसैलाब, दूर होती हैं बड़ी से बड़ी बाधाएं--बालाजी धाम की महिमा ऐसी है कि यहाँ सप्ताह के दो विशेष दिनों—मंगलवार और शनिवार—को भगवान बालाजी का 'दिव्य दरबार' सजाया जाता है। इस दिव्य दरबार में प्रति सप्ताह लगभग एक से दो हजार श्रद्धालु अपनी अर्जियां लेकर पहुँचते हैं। विगत 50 वर्षों से इस दरबार के माध्यम से जनसेवा और भक्ति का अलख जगा रहे परम पूज्य संत गोपाल सिंह जी ने बताया कि यहाँ आने वाले भक्तों को अद्भुत मानसिक और शारीरिक लाभ प्राप्त होता है। दरबार में मुख्य रूप से निम्नलिखित समस्याओं से पीड़ित लोग पहुँचते हैं और लाभ पाते हैं:
प्रेत बाधा और मानसिक कष्ट: वर्षों पुराने संकट और नकारात्मक ऊर्जा से पीड़ित लोगों को यहाँ आकर शांति मिलती है।गंभीर बीमारियाँ: दरबार में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से पीड़ित लोग भी राहत की आस में आते हैं और उन्हें चमत्कारी लाभ मिल रहा है।व्यसन मुक्ति: कई परिवार यहाँ आकर अपने परिजनों की शराब और अन्य नशों की आदतें छुड़वाने में सफल रहे हैं।संतान सुख की प्राप्ति: निसंतान दंपत्तियों की सूनी गोद भरने के कई चमत्कारिक किस्से इस धाम से जुड़े हैं।
संत गोपाल सिंह जी का कहना है: "यह सब बालाजी महाराज की कृपा और भक्तों के विश्वास का फल है। यहाँ कोई भी व्यक्ति निराश होकर नहीं लौटता, बशर्ते वह सच्चे मन से आए।"
24 साल की अनवरत साधना: अखंड जोत और रामायण पाठ--इस मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा का एक बड़ा कारण यहाँ वर्षों से चल रही निरंतर साधना भी है। बालाजी धाम परिसर में पिछले 24 वर्षों से बिना रुके (चौबीसों घंटे) रामायण का पाठ किया जा रहा है। इसके साथ ही, मंदिर के गर्भगृह में अखंड जोत प्रज्वलित है, जो पिछले 24 सालों से लगातार अंधकार को मिटाकर भक्तों के जीवन में सकारात्मकता का प्रकाश फैला रही है। इस निरंतर मंत्रोच्चार और संकीर्तन से पूरे क्षेत्र का वातावरण शुद्ध और भक्तिमय बना रहता है।
मध्य प्रदेश ही नहीं, अन्य राज्यों से भी खिंचे चले आते हैं श्रद्धालु--शुरुआती दौर में इस मंदिर की ख्याति केवल स्थानीय स्तर पर थी, लेकिन जैसे-जैसे लोगों की मन्नतें पूरी होने लगीं, वैसे-वैसे बाबा का चमत्कार दूर-दूर तक फैल गया। आज आलम यह है कि केवल रायसेन या मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों से भी लोग अपनी समस्याओं के निवारण के लिए मेहगांव पहुँच रहे हैं। मंगलवार और शनिवार को पूरा मेहगांव कस्बा एक लघु कुंभ के रूप में तब्दील हो जाता है। चारों तरफ बजरंगबली के जयकारों की गूंज सुनाई देती है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बालाजी महाराज की असीम अनुकंपा से उनके गांव को जो गौरव प्राप्त हुआ है, उससे न केवल क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है, बल्कि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा करने का अवसर भी उन्हें मिल रहा है।यदि आप भी मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं, तो रायसेन जिले की सांची जनपद के मेहगांव का यह प्राचीन बालाजी धाम आपके स्वागत के लिए तैयार है।

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