बिना साइलेंसरों की बाइकों का आतंक: सलामतपुर दीवानगंज में ध्वनि प्रदूषण से सहमे रहवासी
-बस्तियों में गूंज रहे पटाखा साइलेंसर, दिल के मरीज़ों और बुजुर्गों की बड़ी चिंता
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
शांतिपूर्ण जीवन जीने वाले नागरिकों के लिए अब अपने ही घरों में चैन से बैठना मुश्किल हो गया है। सलामतपुर, बेरखेड़ी चौराहा, दीवानगंज और इसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में इन दिनों एक नई और खतरनाक मुसीबत ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। सड़कों और संकरी बस्तियों में बेखौफ दौड़तीं बिना साइलेंसर और मॉडिफाइड साइलेंसर वाली मोटर साइकिलें केवल ध्वनि प्रदूषण ही नहीं बढ़ा रहीं, बल्कि यह दिल के मरीजों के लिए सीधे तौर पर जानलेवा साबित हो रही हैं।इस गंभीर समस्या के बावजूद पुलिस और प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
दहशत का कारण बना 'पटाखा' साइलेंसर--आजकल के युवाओं में अपनी बाइक से कानफोड़ू आवाज निकालने और ध्यान आकर्षित करने का एक अजीब सा शौक पनप रहा है। विशेषकर बुलेट और अन्य भारी इंजन वाली बाइक्स के मूल साइलेंसर को हटाकर उनमें ऐसे अवैध साइलेंसर (जिन्हें बोलचाल में 'पटाखा साइलेंसर' कहा जाता है) लगाए जा रहे हैं। जब ये मनचले युवा इन बाइक्स को लेकर तेजी से बस्तियों के बीच से गुजरते हैं, तो अचानक होने वाले इस तेज धमाके से ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई गोली चली हो या बम फटा हो।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा गंभीर और जानलेवा प्रभाव--इस अमानवीय शोर का सबसे ज्यादा खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ रहा है जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं। जैसे दिल के मरीजों पर जानलेवा असर: डॉक्टरों के अनुसार, अचानक होने वाले तेज धमाके से व्यक्ति के शरीर में एड्रेनालाईन का स्तर एकदम बढ़ जाता है। इससे दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज हो जाती है, जो किसी भी हृदय रोगी के लिए हार्ट अटैक का कारण बन सकती है। और बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में दहशत: तेज आवाज के कारण बुजुर्गों को घबराहट, बेचैनी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी इसका बेहद नकारात्मक असर पड़ता है। वहीं रात के समय इन बाइक्स के गुजरने से छोटे बच्चे अचानक नींद से उठकर रोने लगते हैं। इसके अलावा, परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों की एकाग्रता भी इस शोरगुल से बुरी तरह टूट रही है।
कानून की उड़ रही धज्जियां, जिम्मेदार बने मूकदर्शक--सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह सब कुछ खुलेआम मुख्य मार्गों, बाजारों और चौराहों पर हो रहा है, लेकिन पुलिस और यातायात विभाग पूरी तरह से मूकदर्शक बने हुए हैं। मोटर व्हीकल एक्ट के सख्त नियमों के अनुसारवाहनों की कंपनी द्वारा निर्धारित बनावट या साइलेंसर में किसी भी तरह का ऐसा मॉडिफिकेशन गैर-कानूनी है, जिससे ध्वनि प्रदूषण तय सीमा (डेसिबल) से अधिक हो। ऐसा करने पर भारी जुर्माने से लेकर वाहन जब्ती तक का स्पष्ट प्रावधान है।इसके बावजूद, सलामतपुर और दीवानगंज थाना क्षेत्रों में इन यातायात नियमों का सरेआम मखौल उड़ाया जा रहा है। सड़कों पर न तो कोई सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है और न ही यातायात पुलिस इन उपद्रवी चालकों को रोककर उनके साइलेंसर की जांच कर रही है।
रहवासियों की मांग, तुरंत हो सख्त कार्रवाई--स्थानीय रहवासियों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि उन्होंने कई बार मौखिक रूप से इस समस्या की ओर पुलिस का ध्यान आकर्षित कराने की कोशिश की है, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। क्षेत्र के लोगों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और जिला प्रशासन से मांग की है कि: सलामतपुर, बेरखेड़ी चौराहा और दीवानगंज के मुख्य चौराहों पर तत्काल सघन चेकिंग अभियान शुरू किया जाए। मॉडिफाइड और बिना साइलेंसर वाली बाइक्स को जब्त कर भारी जुर्माना लगाया जाए।और अवैध साइलेंसर बेचने और लगाने वाले मैकेनिकों और दुकानदारों पर भी शिकंजा कसा जाए। जब तक प्रशासन इन मनचले वाहन चालकों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं करता, तब तक आम जनता और मरीजों को इस मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से मुक्ति नहीं मिल सकेगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस खबर के बाद कुंभकर्णी नींद से जागता है या नहीं।
इनका कहना है।
घर के अंदर भी सुरक्षित महसूस नहीं करते।
सड़कों और गलियों में बिना साइलेंसर की गाड़ियां दौड़ाना अब एक फैशन बन चुका है। बस्तियों के भीतर जब ये गाड़ियां अचानक तेज आवाज में पटाखा छोड़ती हैं, तो घर के अंदर बैठे लोग भी थर्रा जाते हैं। क्षेत्र में कई ऐसे बुजुर्ग और दिल के मरीज हैं जिनकी धड़कनें इन धमाकों से अचानक बढ़ जाती हैं। शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है, ऐसा लगता है जैसे प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
कैलाश गोस्वामी, स्थानीय निवासी।
मरीजों और बच्चों का जीना मुहाल हो गया है।
सलामतपुर और दीवानगंज क्षेत्र में इन दिनों यातायात व्यवस्था भगवान भरोसे है। मनचले लड़के तेज रफ्तार में कानफोड़ू आवाज करते हुए निकलते हैं। घर में कोई बीमार व्यक्ति हो तो उसका शांति से लेटना भी दूभर हो गया है। बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। हमारी पुलिस प्रशासन से मांग है कि मुख्य चौराहों पर चेकिंग लगाकर ऐसी गाड़ियों को तुरंत जब्त किया जाए।
पंडित अशोक त्रिपाठी, स्थानीय निवासी।

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