आचार्य विभव सागर और 8 जैन मुनि ससंघ का सलामतपुर में मंगल प्रवेश
-आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हुए प्रवचन, बड़ी संख्या में शामिल हुए समाजजन
-रात्रि विश्राम सांची में और सागर शहर में होगा आगमन
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
सलामतपुर क्षेत्र में गुरुवार का दिन जैन समाज के लिए बेहद खास और ऐतिहासिक रहा। परम पूज्य आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज का ससंघ इंदौर शहर से विहार करते हुए सलामतपुर की पावन धरा पर भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस पावन अवसर पर उनके साथ 8 जैन मुनि संघ भी मौजूद रहा, जिसमें 3 आर्यिका माता जी (महिला जैन संत) जिसमें सलामतपुर की सत्यार्थ माताजी भी शामिल हैं। संतों के नगर आगमन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में सराबोर हो गया।जैसे ही मुनिसंघ ने सलामतपुर की सीमा में प्रवेश किया, वैसे ही समाजजनों ने गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ उनकी अगवानी की। श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के चरणों को पखारा (पाद प्रक्षालन किया) और आरती उतारकर आशीर्वाद लिया।
आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हुए मंगल प्रवचन--मंगल प्रवेश के बाद मुनिसंघ स्थानीय श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुँचा। यहाँ भगवान आदिनाथ के दर्शन-वंदन के बाद एक धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज के दिव्य प्रवचन हुए।अपने मंगल प्रवचन में आचार्य श्री ने जीवन में धर्म, संयम और करुणा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि:
"मानव जीवन बेहद अनमोल है और इसे केवल सांसारिक सुखों में नहीं गंवाना चाहिए। आत्म-कल्याण और जीवों के प्रति दया का भाव ही सच्चे सुख का मार्ग है।" गुरुदेव के अमृत वचनों को सुनने के लिए सलामतपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला, पुरुष और बच्चे मंदिर प्रांगण में एकत्रित हुए। इस दौरान भक्तों में गुरुभक्ति का अनूठा उत्साह देखने को मिला।
सांची में रात्रि विश्राम, अगला पड़ाव सागर शहर--सलामतपुर में धर्म की गंगा बहाने के बाद आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज का संघ आगे के विहार के लिए रवाना हुआ। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुनिसंघ का रात्रि विश्राम ऐतिहासिक नगरी सांची में होगा। सांची में विश्राम और सामयिक (साधना) के बाद यह मुनिसंघ अपनी आगे की पदविहार यात्रा को जारी रखेगा। समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि इस विहार यात्रा का मुख्य अगला पड़ाव सागर शहर है, जहाँ जल्द ही आचार्य श्री ससंघ प्रवेश करेंगे। सागर जैन समाज द्वारा भी गुरुदेव के भव्य स्वागत और चातुर्मास/धर्म प्रभावना को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सलामतपुर के जैन समाज ने मुनिसंघ को ससम्मान और भावभीनी विदाई दी।

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