ISBS समारोह में वेनेगला उपतिस्स नायका थैरो ने कहा कि भारत में रहकर उन्होंने अनेकता में एकता को जिया है, सीखा है
-सांची विश्वविद्यालय में आईएसबीएस रजत जयंती का तीन दिवसीय समारोह का समापन
-आयोजन के विभिन्न सत्रों में बौद्ध धर्म-दर्शन से संबंधित 80 से अधिक शोधपत्र पढ़े गए
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
साँची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय की मेज़बानी में आयोजित इंडियन सोसायटी फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज़ के रजत जयंती समारोह का आज समापन हो गया। तीन दिन चले इस आयोजन के विभिन्न सत्रों में बौद्ध धर्म-दर्शन से संबंधित 80 से अधिक शोधपत्र पढ़े गए। समापन समारोह के मुख्य अतिथि के तौर पर महाबोधि सोसायटी ऑफ श्रीलंका के पूर्व अध्यक्ष वेनेगला उपतिस्स नायका थेरो रहे। वेनेगला उपतिस्स नायका थेरो के हिंदी में हृदय से व्यक्त किए गए उद्गारों की पूरे मंच और दर्शकों-श्रोताओं ने सराहना की। उन्होंने कहा कि सांची ने मुझे गर्व दिया है। वो सांची के स्कूल में पढ़े, कॉलेज एस.एस जैन विदिशा में गए और भोपाल के बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के प्रथम बैच के छात्र रहे। बाद में सारनाथ और वाराणसी में उन्होंने बौद्ध अध्ययन से संबंधितअपनी उच्च शिक्षा बी.एच.यू में हासिल की। उन्होंने कहा कि किसी बौद्ध विश्वविद्यालय को सांची में स्थापित कराने की संकल्पना उनकी थी जिसे कि उन्होंने तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार के समक्ष रखा थे और सांची विश्वविद्यालय की स्थापना 2012 में श्रीलंका के राष्ट्रपति के हाथों हुई। उन्होंने का कि वो सांची विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। और इसके लिए उन्होंने एक पत्र भी लिखा है।
वेनेगला उपतिस्स थैरो ने कहा कि वो मोदी जी से कहेंगे कि विश्वविद्यालय की नींव रखते समय जिस पौधे रूपी विश्वविद्यालय की संकलपना को हमने रोंपा था उसे आपने अर्थात मध्य प्रदेश सरकार ने ही खाद-मिट्टी डालकर एक शानदार विश्वविद्यालय बनाया है। उन्होंने कहा कि वो प्रधानमंत्री श्री मोदी से कहेंगे कि वो इसे और अधिक विस्तार दें कि ये अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय बन जाए।
सांची विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि अगर सांची विश्वविद्यालय अपने अंतरराष्ट्रीय स्वरूप में आ जाएगा तो पूरे विश्व से बौद्ध और वैदिक अध्ययन के विद्यार्थी, शोधार्थी अपने उच्च शिक्षा के लिए यहां आ सकेंगे।
सांची विश्वविद्यालय ने तय किया है कि अगले वर्ष होने वाले अपने प्रथम दीक्षांत समारोह में वेनेगला उपतिस्स नायका थेरो को मानद उपाधि भी प्रदान करेगा।
वेनेगला थैरो ने कहा कि भारत में रहकर उन्होंने अनेकता में एकता को जीया है, सीखा है। उन्होंने कहा कि बनारस हिंदु विश्वविद्यालय में उनके दोस्त सभी धर्मों के लोग थे। थैरो ने कहा कि मैंने बुद्ध की शिक्षाओं के माध्यम से भारत में ही सीखा कि हम सब इंसान हैं। सबको देखो और मुस्कुरा दो। थोड़ा सिर झुका दो तो पूरा विश्व आप अपने साथ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि जब वो महाबोधि सोसायटी में स्तूप के पास कार्य करते थे तो सबसे मुस्कुराकर मिलते थे। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब में जब किसी अन्य धर्म के व्यक्ति को जाने नहीं दिया जाता था तब वो पहले बौद्ध व्यक्ति थे जिनहे उनके व्यवहार के कारण ही सऊदी अरब में जाने दिया गया था।
उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म का कोई स्कूल नहीं होना चाहिए बल्कि स्कूल ऐसे होने चाहिए जिसमें सभी धर्मों के लोग मिलकर पढ़ें ताकि अपनी संस्कृतियां साझा कर सकें। उन्होंने कहा कि वेटिकन के पोप जो अमेरिका के राष्ट्रपति से भी नहीं मिलते उनसे मिलने कोलंबो में उनके महाविहार में आए थे।
एक दिन एक जापानी महिला जिसका नाम युशिदा था वो आई तो वो मुस्कुराकर उससे मिले और उसे एक कप काली चाय पिलवाई। बाद में इसी महिला ने श्रीलंका में 20 स्कूल बनवाए और जापान में थेरवाद तथा महायान के बौद्ध मंदिर भी बनवाए। उन्होंने कहा कि सांची विश्वविद्यालय की स्थापना के पहले भी उन्होंने जापान, दक्षिण कोरिया और श्रीलंका के कई मेहमानों को ये स्थल दिखवाया था।
अपने उद्बोधन में आई.एस.बी.एस के अध्यक्ष प्रो. एस.पी शर्मा ने कहा कि बुद्ध की शिक्षाओं का वेनेगला उपतिस्स थैरो ने पूरा ग्रहण किया है और वो संप्रदायवाद तथा क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर पूरे विश्व के कल्याण के लिए सोचते हैं। प्रो. शर्मा ने कहा कि ज्ञान गोपनीय होता तो नष्ट हो जाता। जितना हम ज्ञान का प्रचार करेंगे उतना ही इसका संवर्धन होगा। उन्होंने कहा कि बुद्ध के ज्ञान को आई.एस.बी.एस संवर्धित करने का प्रयास करता है।
शोधार्थियों और छात्रों से प्रो. शर्मा ने कहा कि अकादमिक जगत में भाषा साहित्यिक अर्थात शिष्ट भाषा होनी चाहिए। उसमें पारिभाषिक शब्दावली का प्रयोग होना चाहिए। आई.एस.बी.एस रजत जयंती समारोह के समापन कार्यक्रम में आई.एस.बी.एस की सचिव प्रो. शास्वती मुतसुद्दी ने तीन दिवसीय अकादमिक समारोह से जुड़ी रिपोर्ट पेश की। साथ ही उन्होंने सांची विश्वविद्यालय में आई.एस.बी.एस के स्थानीय सचिव व सहायक प्राध्यापक डॉ. संतोष प्रियदर्शी को धन्यवाद ज्ञापित किया।
धन्यवाद ज्ञापन उपकुलसचिव विवेक पाण्डेय ने सभी मंचासीन के अलावा सांची विश्वविद्यालय परिवार के प्रत्येक सदस्य को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। आई.एस.बी.एस के रजत जयंती समारोह में विभिन्न देशों से सम्मिलित हुए गणमान्य शिक्षकों, शोधार्थियों को धन्यवाद दिया। वेनेगला उपतिस्स नायक थैरो द्वारा सांची विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाए जाने की बात की सराहना की।
