स्वच्छ नदी, स्वस्थ जीवन के लिए सांची यूनिवर्सिटी के छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का श्रमदान
साँची विवि के योग विभाग ने किया पग्नेश्वर घाट पर बेतवा नदी स्वच्छता एवं जन-जागरूकता अभियान
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के संदर्भ में साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के योग एवं आयुर्वेद विभाग ने बेतवा नदी के पग्नेश्वर घाट पर नदी स्वच्छता एवं जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया। विवि के योग एवं आयुर्वेद विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. उपेन्द्र बाबू खत्री के नेतृत्व में शोधार्थियो एवं छात्रों ने घाट की सफाई की। बेतवा नदी की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा समाज में नदी एवं जल स्रोतों के प्रति जागरूकता विकसित करने हेतु पग्नेश्वर घाट परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में फैले प्लास्टिक, पॉलीथीन, बोतलों तथा अन्य अपशिष्ट पदार्थों को एकत्रित कर सफाई की। अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में कचरा एकत्रित कर उसके उचित निस्तारण की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम में जन अभियान परिषद के कार्यकर्ता टीकाराम लोधी, ग्राम पिपरिया से संदीप राजपूत एवं स्थानीय नागरिक भी शामिल हुए। प्राथमिक चिकित्सा हेतु साँची विवि की डॉ अंजली दुबे एवं कमलेश पाटीदार ने सेवाएं दी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. उपेन्द्र बाबू खत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियों को मातृस्वरूप माना गया है। बेतवा नदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरणीय जीवनरेखा है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह नदी संरक्षण के लिए आगे आए और स्वच्छता को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाए। डॉ खत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने का संदेश भी देता है।
जन अभियान परिषद के टीकाराम ने कहा कि जल संरक्षण और नदी स्वच्छता केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि जनभागीदारी का आंदोलन है। अभियान के दौरान प्रतिभागियों ने घाट क्षेत्र में स्वच्छता कार्य के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों एवं श्रद्धालुओं को जागरूक भी किया। लोगों को नदी में कचरा न फेंकने, एकल उपयोग प्लास्टिक से बचने तथा पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। जन-जागरूकता के उद्देश्य से "नदी बचाओ – जीवन बचाओ", "स्वच्छ नदी – स्वस्थ जीवन" तथा "नदी संरक्षण – राष्ट्र संरक्षण" जैसे नारों का उद्घोष किया गया। सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे न केवल स्वयं स्वच्छता के नियमों का पालन करेंगे, बल्कि अपने परिवार, मित्रों एवं समाज को भी नदी संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए प्रेरित करेंगे। कार्यक्रम के अंत में बेतवा नदी के संरक्षण एवं स्वच्छता के लिए निरंतर प्रयास करते रहने का संकल्प लिया गया।

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