सलामतपुर में उमंग 'हैल्थ एंड वैलनेस' प्रशिक्षण का दूसरा दिन: अब शिक्षक बनेंगे विद्यार्थियों के 'रोल मॉडल'
-होटल संघमित्रा में गूंजा 'हमारा खाना, सेहत का खजाना'; तीन दिवसीय आवासीय शिक्षक प्रशिक्षण में सीखे व्यक्तित्व विकास के गुर
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
आयुष्मान भारत एवं 'उमंग' हेल्थ एंड वैलनेस प्रोग्राम के अंतर्गत, होटल संघमित्रा सलामतपुर में आयोजित तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरा दिन अत्यंत उत्साहजनक और ज्ञानवर्धक रहा। इस विशेष कार्यक्रम में ब्लॉक सांची, बेगमगंज और बाड़ी के हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के 'हेल्थ एंड वैलनेस एम्बेसडर' (शिक्षकों) को प्रशिक्षित किया जा रहा है। फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया एफपीएआई भोपाल शाखा के तत्वावधान में आयोजित इस अनूठे प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को विद्यालयों में स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु सक्षम बनाना है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने किया विशेष निरीक्षण, जाना शिक्षकों का फीडबैक--प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को परखने के लिए कार्यक्रम के दूसरे दिन राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम आरकेएसके की जिला समन्वयक अधिकारी प्रियंका चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहीं। इसके साथ ही, यूएनएफपीए बीजीएमएस की प्रतिनिधि जागृति चौधरी (भोपाल) ने भी प्रशिक्षण सत्रों का सूक्ष्म अवलोकन किया। उन्होंने प्रशिक्षण ले रहे शिक्षकों से सीधा संवाद स्थापित कर उनका फीडबैक लिया। सुश्री चौधरी ने कहा कि शिक्षकों से प्राप्त यह फीडबैक भविष्य में इस प्रकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने में बेहद मददगार साबित होगा।
इन महत्वपूर्ण विषयों पर मास्टर ट्रेनर्स ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण--सत्र के दौरान अनुभवी मास्टर ट्रेनर्स अमिता त्रिपाठी, ऊषा सराठे, अरविंद राय एवं हेमंत लोधी ने शिक्षकों को कई महत्वपूर्ण और व्यावहारिक विषयों से अवगत कराया। प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे।
जेंडर आधारित शिक्षा: कक्षाओं में छात्र-छात्राओं के लिए एक समावेशी, सुरक्षित और समानतापूर्ण वातावरण का निर्माण करना।
नशे से बचाव, विद्यार्थियों में 'रेसिस्टेंस स्किल्स' (प्रतिरोध कौशल) का विकास करना, ताकि वे किशोरावस्था में नशे की प्रवृत्तियों और सामाजिक कुरीतियों से दूर रह सकें।
व्यक्तित्व विकास: छात्रों के भीतर छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए उनकी संवाद शैली, आत्मविश्वास एवं नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने की आधुनिक तकनीकें सिखाना।
पोषण एवं स्वास्थ्य: 'हमारा खाना, सेहत का खजाना' थीम के तहत बच्चों में संतुलित खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता फैलाना।
किशोर स्वास्थ्य परामर्शदाताओं ने निभाई सक्रिय भूमिका--इस महत्वपूर्ण सत्र को सफल और धरातल पर व्यावहारिक बनाने में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों से आए किशोर स्वास्थ्य परामर्शदाताओं की सराहनीय सहभागिता रही। इनमें मिथुन यादव (जिला चिकित्सालय, रायसेन), मृणालिनी दांगी (सिविल अस्पताल, सांची), शुभम कुमार शर्मा (सिविल अस्पताल, उदयपुरा) एवं सुशील कुमार धूमकेती (सिविल अस्पताल, औबेदुल्लागंज) शामिल रहे। इन परामर्शदाताओं ने शिक्षकों के साथ मिलकर विभिन्न स्वास्थ्य केस-स्टडीज पर चर्चा की।
संवाद आधारित कक्षाए---प्रशिक्षण के दूसरे दिन यह साफ नजर आया कि यहाँ से सीखकर जाने के बाद शिक्षक केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे। वे अपने-अपने विद्यालयों में 'संवाद आधारित कक्षाएं' और विशेष गतिविधियों के माध्यम से छात्रों के सच्चे 'रोल मॉडल' बनेंगे। यह तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम रायसेन जिले के स्कूलों में किशोर स्वास्थ्य एवं कल्याण के संदेश को प्रभावी ढंग से पहुँचाने में मील का पत्थर साबित होगा

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