भोपाल विदिशा हाईवे की बालमपुर घाटी बनी 'डेथ ज़ोन': कंटेनर ने बाइक को मारी टक्कर, भाई-बहन घायल
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
भोपाल-विदिशा स्टेट हाईवे-18 पर तेज रफ्तार वाहनों का कहर और जिम्मेदार विभागों की अनदेखी लगातार मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रही है। शनिवार रात करीब 9 से 10 बजे के बीच हाईवे पर स्थित देहरी और बालमपुर गांव के बीच एक बार फिर भीषण सड़क हादसा हो गया। बालमपुर से इलाज कराकर अपने गांव देहरी लौट रहे मोटरसाइकिल सवार भाई-बहन को विदिशा की ओर से आ रहे एक अनियंत्रित कंटेनर ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में देहरी निवासी अनिल भील और उनकी बहन सड़क पर गिरकर घायल हो गए। गनीमत यह रही कि दोनों को गंभीर चोटें नहीं आईं और एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर हाईवे पर सुरक्षा प्रबंधों की पोल खोलकर रख दी है।
हादसे के बाद मच गई अफरा-तफरी, मौके पर जुटी भीड़--
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक का संतुलन बिगड़ गया और दोनों भाई-बहन उछलकर सीधे डामर की सड़क पर जा गिरे। हादसे के तुरंत बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई और कुछ ही देर में राहगीरों व स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस घटना के चलते स्टेट हाईवे पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।जानकारी के अनुसार, अनिल भील अपनी बहन का इलाज कराने बालमपुर गए हुए थे और रात में मोटरसाइकिल से वापस लौट रहे थे। इसी दौरान विदिशा की तरफ से भोपाल जा रहे कंटेनर क्रमांक एमएच 04 एलवाई 7256 ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद स्थानीय निवासियों की मदद से घायलों को संभाला गया।
सड़कों के बीचों-बीच खड़े वाहन बने 'मौत के स्पॉट्स'--भोपाल-विदिशा स्टेट हाईवे-18 और एनएच-146 अब वाहन चालकों के लिए हादसों का गलियारा बनते जा रहे हैं। बालमपुर घाटी से लेकर भदभदा, देहरी, दीवानगंज, कुल्हाड़िया, बेरखेड़ी चौराहा, सलामतपुर, त्रिमूर्ति चौराहा, ढकना चौराहा और आमखेड़ा तक सड़कों के ठीक बीचों-बीच दर्जनों ट्रक और कंटेनर दिन-रात अनधिकृत रूप से खड़े रहते हैं। घंटों लगता है जाम: अवैध पार्किंग के कारण मार्ग पर कई-कई घंटों तक भीषण जाम के हालात निर्मित हो जाते हैं।अंधेरे में नहीं दिखते भारी वाहन। रात के समय हाईवे पर उचित लाइट व्यवस्था न होने से अंधेरा रहता है। ऐसे में तेज गति से आने वाले छोटे वाहन चालकों को सड़क पर खड़े ये विशालकाय वाहन दिखाई नहीं देते और वे सीधे इनसे टकरा जाते हैं।इन ब्लैक स्पॉट्स पर अब तक दर्जनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, जबकि कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं।
12 महीने में 100 से अधिक हादसे, एमपीआरडीसी के सारे प्रयोग फेल--भोपाल-विदिशा हाईवे की बालमपुर घाटी पर हादसों का ग्राफ डराने वाला है। बीते 12 महीनों में इस अकेली घाटी पर 100 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। औसतन हर सप्ताह यहाँ एक से दो हादसे हो रहे हैं, जिनमें कई लोग असामयिक मौत के मुंह में समा चुके हैं।पूर्व में बालमपुर घाटी के अंधे मोड़ पर लोहे की रेलिंग लगाई गई थी, लेकिन लगातार वाहनों की टक्कर से वह बार-बार टूटती रही और वाहन सीधे खाई में गिरते रहे।एमपीआरडीसी ने हादसों को रोकने के लिए टूटी रेलिंग की जगह रेडियम पट्टी लगी सीमेंट की बोरियां रखीं, ताकि रात में चालकों को संकेत मिल सके। अफसोस कि यह अस्थाई जुगाड़ भी एक महीने के भीतर क्षतिग्रस्त होकर नीचे खाई में गिर गया।वर्तमान में एमपीआरडीसी ने घाटी पर सड़क को चौड़ा करने के साथ-साथ नई रैलिंग भी लगा दी है, लेकिन इसके बावजूद रफ्तार पर लगाम न होने और सांकेतिक बोर्ड न होने से हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
इनका कहना है।
मैं और मेरी बहन बालमपुर से इलाज करा के लौट रहे थे, तभी कंटेनर ने हमें टक्कर मार दी। हमारी बाइक अनियंत्रित होकर सड़क पर गिर गई और हम दोनों घायल हो गए। हाईवे पर अंधी रफ्तार से चलने वाले और सड़क पर अवैध रूप से खड़े रहने वाले वाहनों पर पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
अनिल भील, घायल बाइक चालक निवासी-देहरी।
स्टेट हाईवे-18 पर यातायात का अत्यधिक दबाव रहता है। बालमपुर घाटी पर जानलेवा अंधा मोड़ होने के बावजूद सुरक्षा के लिहाज से कोई सांकेतिक बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। इसी लापरवाही के कारण आए दिन हादसे बढ़ रहे हैं। स्थिति यह है कि लोग अब इस मार्ग को 'खूनी सड़क' कहने लगे हैं।
कालूराम मीणा, सरपंच ग्राम पंचायत खोहा।
मैं हर दिन सलामतपुर से भोपाल मोटरसाइकिल से अप-डाउन करता हूं। अब इस हाईवे पर सफर करने में डर लगने लगा है। सड़कों पर वाहन अंधी रफ्तार से दौड़ रहे हैं और उनकी स्पीड पर पुलिस या यातायात विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है। एमपीआरडीसी और पुलिस प्रशासन को तुरंत एक्शन लेना चाहिए।
साजिद खान, स्थानीय निवासी सलामतपुर।






























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